चिराग ने जारी की चाचा-भतीजे के रिश्तों की पुरानी चिट्ठी

चिराग ने जारी की चाचा-भतीजे के रिश्तों की पुरानी चिट्ठी

अपनी ही पार्टी से अपने चाचा पारस के द्वारा बेदखल किये जाने के बाद चिराग पासवान ने पहली बार मुंह खोला और भावनाओं से भरी एक पुरानी चिट्ठी शेयर की है. यह चिट्टी चिराग-पारस रिश्तों की पूरी कहानी कहती है.

1.प्रिय चाचा (पशुपति पारस) जी आज होली के दिन यह पत्र ( 21 मार्च 2021) को लिख रहा हूं. जब तक पापा था होली धूम धाम से हम सब मिल कर मनाते थे. अब वह नहीं हैं. वैसी होली अब शायद ही कभी हम सब मना सकें. मैं ने खालिक साहब और सूरज भान जी के साथ आपसे मिलने की कई बार कोशिश की. ताकि हमारे बीच कोई समस्या है तो उसे सुलझा लिया जाये. लेकिन आपकी तरफ से कोई सकारात्म जवाब नहीं आया तो यह पत्र लिख रहा हूं.

2.चाचा रामचंद्र पासवान के निधन ( 2019) से ही मैं आप में बदलाव देख रहा हूं. उनके निधन के बाद चाची ने प्रिंस की जिम्मेदारी मुझे दी और कहा कि मैं उसके भविष्य को संवारूं. इसी के मद्देनजर मैंने पार्टी के बिहार प्रदेश की कमान प्रिंस के हाथ दी ताकि वह अपने पांव जमाये और आगे बढ़े. मैंने सोचा की प्रिंस को दी गयी जिम्मेदारी से आप खुश होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और आपने उसे बधाई तक नहीं दी.

3. जिस दिन मुझे पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया उस दिन आप पांच मिनट के लिए आये. प्र्स्तावक बने और चले गये. उसके बाद से आपने आना जाना कम कर दिया. आपके इस व्यवहार से पापा बहुत दुखई थे.

4. मुझए याद है कि रातोंरात आपको नीतीश कुमार जी ने मंत्री बना दिया. पापा खुश थे. लेकिन आपको पशुपालन विभाग दिये जाने के कारण वह दुखी थे. इससे पहले पापा ने कई बार अमित शाह जी से बात की थी कि किसी आयोग का अध्यक्ष आपको बनाय जाये.

5. लाक डाउन के समय लोगों में अनाज बांटने को ले कर पापा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच विवाद हुआ. उस समय उनकी पार्टी की तरफ से कई बार प्रहार किया गया लेकिन आप खआमोश रहे. कभी आपने इस संबंध में नीतीश कुमार से कोई बात नहीं की.

6. पापा के देहांत के बाद जब चुनाव की तैयारियों का वक्त आया तो मैंने सोचा कि आप पापा की कमी पूरी करेंगे लेकिन आपने चुनाव तैयारी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. मैं आपका मार्गदर्शन चाहता था लेकिन आपने कभी कोई दिलचस्पी नहीं ली. आपने यह भी नहीं जानना चाहा कि उनके नहीं रहने पर मैं अकेल चुनाव का खर्च कैसे उठा रहा हूं.

7.चुनाव के वक्त आपने पांच सिंबल की मांग की थी जो मैंने आपकी मर्जी के मुताबिक भेजवा दिया. सिर्फ दो सिंबल नहीं दिया तो आप नाराज हो गये. पापा की मौत के बाद आपने जिस तरह का सुलूक किया उससे मेरा दिल टूट गया.

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