इर्शादुल हक, संपादक, नौकरशाही डॉट कॉम

झूठ और वो भी निर्लज्जता से, बेशर्मी और ठिठाई से बोला जाये. और यह सोच लिया जाये कि कोई नहीं पकड़ेगा. तो वह मुगालते में है. इन दिनों चुनाव आयोग बड़ी निर्ममता से, निर्लज्जता से, बेहयाई से झूठ परोसने में जुटा है.

इस झूठ के लिए वह गोदी पत्रकारों को व्हाट्सऐप ठेलता है और कहता है कि “सूत्रों” के हवाले से खबर चला दो. बसे देखते ही देखते गोदी पत्रकार खबरें ठेलने लगते हैं.

लेकिन सदन में आज तेजस्वी यादव ने इस झूठ को पंचर कर दिया. सूरत ए हाल यह हो गयी कि ज्ञानेश गुप्ता के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग को तेजस्वी लताड़ रहे थे, लेकिन भाजपाइयों के पसीन छूट रहे थे.

दर असल मामला यूं था कि पिछले दिनों गोदी पत्रकारों ने चुनाव आयोग के “सूत्रों” के हवाले से खबर दी थी कि बिहार में नेपाली, बांग्लादेश और म्यांमारी लोगों ने बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट में अपने नाम चढ़वा लिये हैं. इस पर तेजस्वी ने भरे सदन में चुनाव आयोग के “सूत्रों” की बखिया उधेड़ दी.

तेजस्वी ने आयोग द्वारा सैकड़ों पेज के हलफनामे का जिक्र किया. जिसमें आयोग ने उन देशों के नागरिकों के वोटर लिस्ट में नाम की चर्चा तक नहीं की है. अगर यह सत्य होता तो आयोग दर्जनों पेज खपा कर इसका उल्लेख करता.

तेजस्वी के इतना कहते ही भाजपा के प्रेम कुमार की कुलबुलाहट देखते बन रही थी. ऐसा लग रहा था कि वह सदन में चुनाव आयोग के जासूस हों. प्रेम कुमार कुछ बकलोली करने लगे. फिर तेजस्वी ने प्रेम कुमार की सदन में ऐसी जगहंसाई करवाई कि उन्होंने अपने लम्बे कुर्ते का पिछवाड़ा संभालते हुए बेंच पर बैठ जाने में ही भलाई समझा.

 

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