कांग्रेस ने दलित नेता को डिप्टी CM बना चली बड़ी चाल, BJP परेशान

कांग्रेस ने दलित नेता को डिप्टी CM बना चली बड़ी चाल, BJP परेशान

कांग्रेस ने दलित नेता को डिप्टी CM बना चली बड़ी चाल, BJP परेशान। तेलंगाना और कर्नाटक में भाजपा की 29 लोकसभा सीटों पर संकट बढ़ा।

पिछले महीने कर्नाटक के वरिष्ठ दलित नेता तथा भाजपा सांसद रमेश जिगाजिनागी ने कहा था कि भाजपा में दलित नेताओं के आगे बढ़ने के लिए कोई अवसर नहीं है। और अब कांग्रेस ने तेलंगाना में वरिष्ठ दलित नेता और चार बार के विधायक मल्लू भट्ठी विक्रमार्क को उपमुख्यमंत्री बना दिया है। वे तेलंगाना के पहले दलित उपमुख्यमंत्री बन गए हैं। कांग्रेस के इस निर्णय का 2024 लोकसभा चुनाव में तेलंगाना और पड़ोसी राज्य कर्नाटक में असर पड़ना तय माना जा रहा है।

याद रहे तेलंगाना में 18 प्रतिशत दलित हैं, जबकि कर्नाटक में लगभग 20 फीसदी दलित हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में तेलंगाना की कुल 17 सीटों भाजपा को चार सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कर्नाटक में लोकसभा की कुल 28 सीटें है, जिनमें भाजपा को 25 पर जीत मिली थी। दोनों प्रदेशों को मिला दें तो भाजपा की 29 लोकसभा सीटें हैं। अब कांग्रेस ने जिस प्रकार दलित नेता को उपमुख्यमंत्री बनाया है, उसका न सिर्फ तेलंगाना बल्कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक पर भी असर पड़ेगा। इस तरह कांग्रेस ने मंत्रिमंडल बनाने में लोकसभा चुनाव के लिए समीकरण बना दिया है।

उधर भाजपा का हाल यह है कि पिछले महीने कर्नाटक के दलित नेता तथा भाजपा सांसद रमेश जिगजिगानी ने कहा था कि भाजपा में दलितों का आगे बढ़ना मुश्किल है। आगे बढ़ने के रास्ते बंद हैं। स्पष्ट है कि कर्नाटक तथा तेलंगाना में भाजपा नेतृत्व से उनकी अपनी पार्टी के दलित नेता ही नाराज हैं। ऐसे में कांग्रेस ने जिस प्रकार दलित नेता को उप मुख्यमंत्री बनाया, उसका असर आगामी लोकसभा चुनाव पर पड़ा, तो भाजपा की 29 सीटें पर संकट छा जाएगा।

यही नहीं कांग्रेस ने तेलंगाना में दलित नेता को डिप्टी सीएम बना कर भाजपा पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी बना दिया है कि वह छत्तीसगढ़, मप्र और राजस्थान में दिलत नेता को उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री बनाए।

कौन हैं मल्लू भट्ठी विक्रमार्क

तेलंगाना के नए उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्ठी विक्रमार्क राज्य के बड़े दलित नेता हैं। वे चौथी बार चुनाव जीते हैं। 2018 विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के 12 विधायक पार्टी छोड़कर बीआरएस में चले गए थे, लेकिन विक्रमार्क पार्टी के संकटकाल में भी पार्टी के साथ रहे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद मिक्रमार्क ने तेलंगाना में 1400 किमी लंबी पदयात्रा की। लगातार 100 दिनों तक पदयात्रा चली थी। वे जमीन से जुड़े नेता हैं।

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