कोरोना के नए वैरिएंट से बचने के लिए जागरुकता ज़रूरी : एपी पाठक

कोरोना के नए वैरिएंट से बचने के लिए जागरुकता ज़रूरी : एपी पाठक

बाबु धाम ट्रस्ट के संस्थापक एपी पाठक ने कोरोना वायरस के नए वेरिएंट के प्रति जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यकर्ताओं को संबेधित किया।

बाबु धाम ट्रस्ट के दिल्ली स्थित कार्यालय में कोरोना वायरस संक्रमण ओमिक्रॉन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें ट्रस्ट के चंपारण के भी कार्यकर्त्ता वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।

इस अवसर पर बाबु धाम ट्रस्ट के संस्थापक एपी पाठक ने कहा की विश्व विगत दो वर्षो से माहामारी से परेशान हैं और विश्व के अनेक देशों में नए वैरिएंट ने दस्तक दी है। इससे बचने के लिए सभी को मास्क पहनने और वैक्सीनेशन की जरुरत है। साथ ही शारीरिक दूरी बनाएं रखने की जरूरत हैं।
साथ ही पाठक जी ने मिडिया को बताया की सरकार और हम सभी मिलकर आशा कार्यकर्ताओं, जीविका महिलाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जागरुकता कार्यक्रम चला सकते हैं फलस्वरुप लोगों के अंदर कोरोना से बचने और नए वैरिएंट ओमिक्रोन के प्रति सचेत रहने में मदद मिलेगी।

इस कार्यक्रम के में वर्चुअल माध्यम से एपी पाठक ने अपने ट्रस्ट के चंपारण के कार्यकर्ताओ को सीधा निर्देश और सलाह भी दिया जिसको अविलंव अमलीजामा पहनाने को निर्देश भी दिया।

यह सर्विदित है कि बाबु धाम ट्रस्ट कोरोना से बचाव के लिए लोगों के बीच मास्क, सेनेटाइजर, साबुन, दावा और अन्य ज़रूरी सामानों की निर्बाध आपूर्ति लोगों के बीच निःशुल्क रूप से करते आ रही हैं। साथ ही लॉकडाउन में गरीबों के बीच अनाज और पक्का पकाया भोजन भी वितरित किया।

दिल्ली सहित देश के कई भागों में ट्रस्ट के बैनर तलें सेनेटाइजेशन भी हुआ और यह अभी भी अनवरत जारी हैं। एपी पाठक और उनकी पत्नी मंजुबाला पाठक ने ट्रस्ट के माध्यम से चंपारण में कोरोना से बचाव और लॉकडाउन्न में लोगों की मदद के लिए अनेकों कार्य किए और आज भी अनवरत चालू भी हैं। उक्त दंपति ने बाढ़ के समय भी लोगों के बीच जाकर उनकी समस्या सुनी और तत्काल निराकरण भी किया।

आपको बताते चलें कि बाबु धाम ट्रस्ट की स्थापना से ही एपी पाठक ने चंपारण के लोगों के भलाई और विकास के लिए युद्ध स्तर पर काम करना शुरू कर दिया था उसी की परिणति है की आज देश स्तर पर लोगों की भलाई हेतु कार्य ट्रस्ट के माध्यम से इस कोरोना काल में होते आया हैं।

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