डॉ. अनिल सुलभ फिर से ‘वाजा’ बिहार के चुने गए अध्यक्ष

डॉ. अनिल सुलभ फिर से ‘वाजा’ बिहार के चुने गए अध्यक्ष

डॉ. अनिल सुलभ लेखकों और पत्रकारों के साझा मंच, राइटर्स एंड जर्नलिस्ट्स ऐशोसिएशन (वाजा) के फिर से अध्यक्ष चुने गए। 35 सदस्यीय नई कार्य समिति का गठन।

लेखकों और पत्रकारों के साझा मंच, राइटर्स ऐंड जर्नलिस्ट्स ऐशोसिएशन (वाजा), इंडिया की बिहार प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पद पर पुनः डा अनिल सुलभ का निर्वाचन किया गया है। मंगलवार को, संघ के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ पत्रकार शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी की उपस्थिति में, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन सभागार में आयोजित संघ की आम सभा में डा सुलभ को सर्वसम्मति से पुनः अध्यक्ष चुना गया। बैठक में पुनर्निर्वाचित अध्यक्ष को नई कार्यसमिति के गठन के लिए अधिकृत किया गया।

डा सुलभ ने निम्नलिखित रूप में वाजा, बिहार की ३५ सदस्यीय नई कार्य समिति गठित की है;-
डा अनिल सुलभ (अध्यक्ष), डा शंकर प्रसाद, डा पूनम आनंद, रमेश कँवल, डा सीमा रानी (सभी उपाध्यक्ष), कुमार अनुपम (महासचिव),उमाशंकर सिंह (संगठन सचिव ), पुष्कर कुमार (प्रचार सचिव), डा अर्चना त्रिपाठी, डा सागरिका राय, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, डा अमरनाथ प्रसाद, नीरव समदर्शी, (सभी सचिव), शमा कौसर ‘शमा’, संजू शरण, मोईन गिरीडीहवी, अनवार उल्लाह, कौशलेंद्र पाण्डेय (सभी संयुक्त सचिव), ओम् प्रकाश पाण्डेय ‘प्रकाश’, डा प्रतिभा रानी, चितरंजन भारती, मदन मोहन ठाकुर, डा शालिनी पाण्डेय, डा पंकज वासिनी, ब्रजेश मिश्र, जय प्रकाश पुजारी, रमाकान्त पाण्डेय, कृष्ण रंजन सिंह, तलत परवीन, डा रेखा सिन्हा, श्रीकांत व्यास, प्रमोद कुमार,अमित कुमार सिंह (सभी कार्यकारिणी सदस्य)।

नवगठित कार्य समिति को बधाई देते हुए वाजा के राष्ट्रीय महासचिव शिवेंद्र प्रकाश द्विवेदी ने आशा व्यक्त की है कि प्रदेश समिति बिहार के साहित्यकारों और पत्रकारों की समस्याओं की पहचान कर उनके निदान और उनके हितों तथा सम्मान की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेगी।

सदस्यों के प्रति आभार प्रकट करते हुए डा सुलभ ने साहित्यकारों और पत्रकारों, दोनों समुदायों के साझा-हित पर विस्तार से चर्चा की तथा कहा कि समाज की दशा सुधारने और उसे एक सकारात्मक और गुणात्मक दिशा देने की शक्ति इन्हीं दोनों समुदायों के हाथ में है। इसीलिए इन्हें अपने कर्तव्यों एर दायित्वों की गहरी समझ होनी चाहिए। हमें मिलकर एक दूसरे की समस्याओं की पड़ताल और निदान करते हुए, एक दूसरे का पूरक बनना चाहिए।

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