EWS आरक्षण खत्म हो सकता है, SC में चल रहा मामला

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग EWS के लिए जारी आरक्षण खत्म हो सकता है। SC में चल रहा मामला। आरक्षण के बुनियादी सिद्धांत के विपरीत है EWS।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था आरक्षण के मूल सिद्धांत के ही खिलाफ है। आरक्षण सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए है। इसका आधार आर्थिक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ईडब्ल्यूएस आरक्षण की व्यवस्था, जिसे संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम के तहत दिया गया है, वह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन तो नहीं कर रहा।

103वें संशोधन में संविधान में उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े वर्गों, अजा और अजजा के अलावा EWS वर्गों को 10 प्रतिशत तक आरक्षण प्रदान करता है। कोर्ट के रुख को देखते हुए माना जा रहा कि ईडब्ल्यूएस कोटा समाप्त हो सकता है, क्योंकि संविधान केवल सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग को आरक्षण की बात करता है। आर्थिक आधार को आरक्षण का आधार नहीं माना गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप मंडल ने कहा-EWS आरक्षण ख़त्म होने जा रहा है। सरकार ये साबित नहीं कर पाई कि ग़रीबी के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण में SC, ST, OBC के गरीब क्यों नहीं हैं। साथ ही ये भी साबित हुआ कि 10% सवर्ण EWS आरक्षण से SC, ST, OBC के अनरिजर्व सीट पर चुने जाने के मौक़े कम होंगे। मंडल ने यह भी कहा कि सपा और बसपा को इतिहास की धारा के खिलाफ नहीं होना चाहिए। EWS का समर्थन करके उन्हें कुछ नहीं मिला। EWS का समर्थन करने के बाद हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा हार चुकी हैं।

लेखक अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि EWS कोटे में केवल कथित सवर्ण वर्ग के ग़रीब क्यों आने चाहिए? ग़रीब तो किसी भी वर्ग का हो सकता है। फिर तो इसका नाम सीधे सवर्ण कोटा रखना उचित होगा। पत्रकार प्रशांत टंडन ने कहा-गरीबी उन्मूलन की तमाम स्कीमें हैं, आरक्षण का उद्देश्य तो सामाजिक न्याय है।

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By Editor


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