हाशिये के महानायक बिरसा मुंडा की सुशील मोदी ने की उपेक्षा

हाशिये के महानायक बिरसा मुंडा की सुशील मोदी ने की उपेक्षा

जल-जंगल-जमीन और आजादी के लिए अंग्रेजों से अंतिम सांस तक लड़नेवाले बिरसा मुंडा का आज शहादत दिवस है। सारे नेताओं ने याद किया, पर सुशील मोदी ने की उपेक्षा।

बिरसा मुंडा सिर्फ इतिहास नहीं हैं, वे भविष्य की राह दिखानेवाले महानायक भी हैं। छोटी-सी उम्र में उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्य को चुनौती दी। आदिवासियों को जल-जगल-जमीन और मुक्ति के लिए संगठित किया। आज उनके शहादत दिवस पर देश ने उन्हें याद किया। सोशल मीडिया पर सुबह कई घंटों तक एक नंबर पर हैशटैग बिरसा मुंडा ट्रेंड करता रहा। इस सबके बीच भाजपा सांसद सुशील मोदी ने बिरसा मुंडा के लिए दो शब्द भी ट्वीट नहीं किए।

भाजपा सांसद सुशील मोदी बिहार ही नहीं, यूपी, बंगाल से लेकर केरल तक के मामलों पर ट्वीट करते हैं। सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। लेकिन आज उन्होंने बिरसा मुंडा को याद नहीं किया।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने बिरसा मुंडा को याद किया। हालांकि याद करने में भी एक फर्क दिखता है। कई नेताओं ने बिरसा को स्वतंत्रता आंदोलन का नेता तो बताया, पर जल-जलग-जमीन की बात नहीं की। बिरसा इस पर आदिवासियों की स्वाभाविक दावेदारी मानते थे। आज जल-जंगल-जमीन पर कॉरपोरेट की दावेदारी दिखती है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने ट्विट किया- महान स्वतंत्रता सेनानी जल, जंगल, जमीन की लड़ाई के प्रतीक महान नेता बिरसा मुंडा जी के शहादत दिवस पर शत-शत नमन। वहीं बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने ट्वीट किया-महान आदिवासी नेता, समाज सुधारक, “धरती आबा” भगवान बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि। देश की स्वतंत्रता तथा अंग्रेजों के खिलाफ उनका संघर्ष एवं बलिदान सदैव अविस्मरणीय है।

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बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों के हक की बात की। ट्वीट किया- पराक्रम के परिचायक, अत्याचार, अन्याय, शोषण व अंग्रेजों की निरंकुशता के विरुद्ध जल, जंगल, जमीन एवं आदिवासी अस्मिता की अलख जगाने वाले कम उम्र के महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि प्रणाम व भावभीनी श्रद्धांजलि।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने ट्विट किया-

मैं केवल देह नहीं

मैं जंगल का पुश्तैनी दावेदार हूं

पुश्तें और उनके दावे मरते नहीं

मैं भी मर नहीं सकता

मुझे कोई भी जंगलों से बेदखल नहीं कर सकता

उलगुलान!

उलगुलान!!

उलगुलान!!!

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