*जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती के वासियों को पटना उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है।

 

*जयमंगला गढ़ की मुसहर बस्ती अतिक्रमण नहीं है- पटना हाईकोर्ट*
*जयमंगला गढ़ मुसहर बचाओ संघर्ष को मेधा पाटकर का समर्थन*

आज मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और जस्टिस नानी ताग्या की खंडपीठ ने CWJC -19823/2024 की सुनवाई की।सुनवाई के दौरान विद्वान महाधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जयमंगला गढ़ में निवासरत पर्चाधारी अतिक्रमणकारी नहीं हैं और अगर उन्हें विस्थापित करना होगा तो पहले उन्हें दूसरे स्थल पर पुनर्वासित किया जाएगा।

 

ज्ञात हो को कि उजाड़ने के शासकीय निर्देश के खिलाफ जयमंगला गढ़ की रहवासी सरोज देवी,कला देवी,धनिक सदा की ओर से एक इंटरवेनर पेटीशन दाखिल किया गया था।जिसे बहस के दरम्यान अदालत ने स्वीकार किया और आगे सरकार और इंटरवेनर दोनों को
प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।अगली सुनवाई तक सरकार के द्वारा मुसहर बस्ती को दखल नहीं किया जाएगा।जयमंगला गढ़ के मुसहर बस्ती की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय और सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी .के शाही ने बहस की।सुनवाई के दरम्यान जयमंगला गढ़ के पीड़ितों की ओर से पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार सिंह,नैना और बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट और शोधार्थी -लेखक पुष्पराज उपस्थित थे।

 

महादलित मुसहरों की विधिक सहायता के लिए जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पूर्व पंचायत समिति रामनरेश सदा ने पीयूसीएल के प्रति आभार प्रकट किया है।पीयूसीएल के प्रदेश महासचिव सरफराज ने जयमंगला गढ़ के मुसहर समाज को विस्थापन से बचाने के संघर्ष को मानवाधिकार और मानवता के हित का संघर्ष बताया है।

 

प्रसिद्ध समाजसेवी और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष को अपना समर्थन देते हुए उन्हें उजाड़ने की के खिलाफ माननीय पटना उच्च न्यायालय के निर्णय को महादलितों के पक्ष में मानवतावादी न्याय कहा है।

By Editor