जाति गणना : बिहार के 64 % परिवार की आय दस हजार से कम

जाति गणना : बिहार के 64 % परिवार की आय दस हजार से कम। बिहार सरकार ने जाति गणना के साथ आर्थिक रिपोर्ट पेश कर दी है। किधर जाएगी राजनीति?

बिहार सरकार ने बिहार विधानसभा में मंगलवार को जाति आधारित गणना के साथ ही आर्थिक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट पेश कर दी है। इसके अनुसार प्रदेश के के 64 % परिवार की आय दस हजार रुपए से भी कम है। यानी इस महंगाई के दौर में 64 प्रतिशत घर-परिवार दस हजार से भी कम आय पर किसी तरह जी रहे हैं। जाहिर है इसमें उनके बच्चों को कैसी शिक्षा मिल रही होगी और कैसा खाना खा रहे होंगे यह समझा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार 34.13 परिवार की आमदनी महीने में छह हजार रुपए या उससे से भी कम है। 29.61 प्रतिशत परिवार दस हजार रुपए या उससे कम आय वाले हैं। सिर्फ 28 प्रतिशत परिवार की आबादी दस से 50 हजार रुपए मासिक है। जाहिर है बिहार को गरीब प्रदेश ही कहा जाएगा।

जाति के आधार पर आर्थिक स्थिति को देखें तो सामान्य वर्ग के अंदर 25.09 फीसदी गरीब परिवार हैं। पिछड़ा वर्ग में 33.16 फीसदी गरीब परिवार हैं और अत्यंत पिछड़ा में 33.58 फीसदी गरीब हैं। इसी तरह अनुसूचित जाति में 42.93 फीसदी परिवार गरीब हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति में 42.70 फीसदी गरीब परिवार हैं। अन्य जातियों में 23.72 फीसदी गरीब परिवार। स्पष्ट है सबसे ज्यादा गरीबी दलितों और आदिवासियों में है।

इसी रिपोर्ट यह भी सामने आया कि सिर्फ 4.5 प्रतिशत लोगों के पास अपनी गाड़ी है। शेष 95.5 प्रतिशत आबादी के पास अपना वाहन नहीं है। सिर्फ 3य8 प्रतिशत लोगों के पास मोटरसाइकिल है, जबकि तीन पहिया 0.11 प्रतिशत तथा के साथ आर्थिक रिपोर्ट पेश कर दी है। किधर जाएगी राजनीति?

सामान्य वर्ग में 25.09 प्रतिशत गरीब हैं। इनमें 25.32 प्रतिशत भूमिहार, 25.3 प्रतिशथ ब्राह्मण, 24.89 प्रतिशत राजपूत गरीब हैं। पिछड़ी जातियों में 35.87 प्रतिशत यादव, 34.32 प्रतिशत कुशवाहा तथा 29.9 प्रतिशत कुर्मी गरीब हैं।

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By Editor


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