लुलु मॉल ने कहा हिंदू महासभा का आरोप गलत, 80 फीसदी हिंदू कर्मी

लुलु मॉल ने कहा हिंदू महासभा का आरोप गलत, 80 फीसदी हिंदू कर्मी

लुलु मॉल उद्घाटन के बाद से ही विवादों में हैं।हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया कि मॉल में 70 फीसदी मुस्लिम पुरुष कर्मी हैं। लुलु ने आरोप को खारिज किया।

लखनऊ का लुलु मॉल फिर विवाद में है। कई हिंदूवादी संगठनों ने आरोप लगाया कि मॉल में 70 फीसदी कर्मी मुस्लिम पुरुष हैं। अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने इस संबंध में एक शिकायत भी दर्ज कराई है। शिकायत के जवाब में लुलु मॉल ने विज्ञप्ति जारी करके कहा कि आरोप बिल्कुल निराधार है। आरोप के विपरीत मॉल में 80 फीसदी कर्मी हिंदू हैं।

इससे पहले लुलु मॉल में कुछ लोगों के नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल कराया गया। मॉल पर सवाल उठा कि सार्वजनिक जगह पर नमाज क्यों पढ़ी गई। इसके बाद तो गोदी मीडिया में यह बहस चलती रही। इस बीच कई लोगों ने सवाल उठाया कि जो लोग नमाज पढ़ रहे हैं, वे अलग-अलग दिशाओं में नमाज पढ़ रहे हैं। जबकि मुस्लिम जब भी नमाज पढ़ते हैं एक ही दिशा में नमाज पढ़ते हैं। हालत यह है कि वीडियो देखने के बाद पुलिस को भी मानना पड़ा कि नमाज पढ़नेवालों को मालूम नहीं था कि नमाज कैसे पढ़ी जाती है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सभी बदमाशों को गिरफ्तार किया जाएगा। अब तो सबके नाम भी सामने आ चुके हैं। क्राइम रिपोर्ट्स इंडिया ने लिखा है कि जन लोगों ने मुस्लिम बन कर नमाज पढ़ी, उनके नाम हैं-आरोन नाथ योगी, कृष्ण कुमार पाठक, गौरव गोस्वामी व अन्य। कई लोगों ने इस तरह नमाज पढ़ने को बड़ी साजिश बताया। अब देखना है कि पुलिस तह तक जाती है, या मामले को रफा-दफा कर देती है।

मालूम हो कि लुलु मॉल का निर्माण अबू धाबी स्थिति लुलु ग्रुप ने किया है, जिसके प्रमुख भारतीय मूल के यूसुफ अली हैं।

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