प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 वीं बार बिहार आ रहे हैं। क्या उन्हें प्रदेश में भारी नुकसान होने का अंदेशा है? तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के नेताओं ने उनके दौरे पर सवाल उठाए हैं।

पटना  एयरपोर्ट से लेकर राजेंद्र नगर तक घंटों पहले से हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी खड़े हैं। हर चौराहे पर बेरिकेडिंग की गई है। सोमवार शाम प्रधानमंत्री भाजपा के दिवंगत सासंज सुशील कुमार मोदी के आवास पर श्रद्धांजलि प्रकट करने जाएंगे। वे आज पटना में ही रुकेंगे। मंगलवार को वे महाराजगंज तथा पूर्वी चंपारण में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे।

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री की लगातार यात्रा पर सात सवाल खड़े किए हैं। कहा किमाननीय प्रधानमंत्री जी, आप इस चुनाव में वीं बार बिहार आ रहे हैं। आप हार के डर से भले ही हमें लाख गालियां दीजिए, इस झुलसती गर्मी में जब तक आपके हृदय को ठंडक ना मिले तब तक इस साल के तेजस्वी पर निम्नस्तरीय निजी हमले करते रहें, पर आपसे हाथ जोड़कर विनम्र प्रार्थना है कि आप मेरे बिहार और प्यारी जनता के सवालों का जवाब भी अवश्य ही दीजिए। बिहार एकालाप कतई पसंद नहीं करता।

. प्रधानमंत्री जी, बिहार  की जनता आपसे जानना चाहती है कि आपने सालों में बिहार से जो वादे किए थे उनमें से एक भी वादा आप पूरा क्यों नहीं कर पाए? क्यों आप अब अपने ही वादों पर कुछ नहीं बोलते हैं?

. आपको में से सांसद देने वाले बिहारवासियों को आप बताइए कि आपकी बिहार के विकास के लिए क्या योजना है? आपका बिहार को लेकर क्या विजन है?

. आप ना ही अपने ही कार्यकाल के साल पीछे की बात कर रहे हैं और ना ही आगे की योजनाओं पर कोई बात कह रहे हैं?

. आप बिहारवासियों की आशाओं और अपेक्षाओं को केवल किलो अनाज में ही क्यों तौलते हैं? देश के सबसे प्रतिभाशाली और मेहनती लोग बिहार के ही है। ऐसी बात कर आप बिहारियों की तौहीन करते है क्या?

. आपको शायद याद ना हो किंतु आदर्श गंगा योजना, नमामि गंगे, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, बुलेट ट्रेन, किसानों की आय दोगुना करना, हर गरीब को पक्का मकान देना, हवाई जहाज में हवाई चप्पल पहनने वाले को बिठाना.. ये सब आपकी ही योजनाएँ हैं। आज सभी योजनाएँ और वादे धराशायी क्यों पड़े हैं?

बीच चुनाव एनडीए ने मांझी को किया दरकिनार

. नौकरी के तमाम दावों और प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार के वादे के बावजूद आपके कार्यकाल में नौकरी और रोजगार की स्थिति बद से बदतर क्यों हो गई? क्यों आप नौकरी-रोजगार का नाम तक भूल गए हैं?

. चुनावों में बेरोजगारी और महँगाई जैसे जनता को कचोट रहे समस्याओं पर बोलने के बजाय हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, हिंदुस्तान-पाकिस्तान, संपत्ति-मंगलसूत्र जैसी बचकानी बातें कर के देश की कौन सी समस्या का समाधान कर रहे हैं?

आपको जनता की समस्याओं और मुद्दों पर बात करनी ही होगी।

दलित मंत्री बड़े मंचों से दूर, नुक्कड़ सभा करने को मजबूर

By Editor


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