मोदी सरकार के आईटी नियमों को वाट्सएप ने दी चुनौती

मोदी सरकार के आईटी नियमों को वाट्सएप ने दी चुनौती

अबतक सोशल मीडिया को भाजपा की ताकत बताया जाता था। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इसके फायदे बता चुके हैं। लेकिन अब समय बदल रहा है।

सोशल मीडिया और भाजपा में मधुर संबंधों का दौर लगता है खत्म हो रहा है। आज फेसबुक से संबंध रखनेवाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वाट्सएप भारत सरकार के आईटी रूल्स के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया। वाट्सएप ने भारत सरकार के नियमों को चुनौती दी है।

वाट्सएप ने आज दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कहा- वाट्सएप में भेजे गए संदेश किसने पहली बार भेजे यह बताना नागरिकों की निजता के अधिकार का हनन होगा।

जब से भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के ट्वीट को ट्विटर ने मेनपुलेटड मीडिया करार दिया, तबसे सोशल मीडिया पर अंकुश की बातें चलने लगी हैं। मालूम हो कि दो दिनों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई ट्विट नहीं किया। इससे इस प्रचार को बल मिला कि भारत में ट्विटर और फेसबुक पर प्रतिबंध लगेगा। लेकिन आज प्रधानमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा पर एक ट्विट किया।

उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे दफन किए कब्रों, अस्पतालों में बिना इलाज मर रहे लोगों के दर्द सामने आने से भी सरकार परेशान है।

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वाट्सएप ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है। इसने कहा कि आईटी रूल्स का यह हिस्सा भारत के संविधान के खिलाफ है। वाट्सएप ने यह भी कहा कि नए रूल से कंपनी को किसने क्या कहा इसे जमा करना होगा और सुरक्षित रखना होगा, जबकि करोड़ों की संख्या में मैसेज आदान-प्रदान किए जाते हैं। अगर सरकार को ये सूचना दी जाए, तो कई निर्दोष लोग फंस जाएंगे।

इस बीच सोशल मीडिया पर #BJP_Fears_SocialMedia ट्रेंड करने लगा। इस हैशटैग के साथ खबर लिखे जाने तक लगभग दो लाख लोग ट्विट कर चुके हैं। ट्विट करने वालों में किसान आंदोलन के समर्थक, आरक्षण के पक्ष में अभियान चलानेवाले समूह, रोजगार की मांग करनेवाले अनेक संगठन शामिल हैं।

अब मामला कोर्ट में है और देखना है क्या फैसला आता है।

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