कोरोना काल में कुछ मुसलमान नीतीश के कायल क्यों हुए

कोरोना काल में कुछ मुसलमान नीतीश के कायल क्यों हुए

कोरोना काल में कुछ मुसलमान नीतीश के कायल क्यों हुए

पिछले दिनों अखबारों के एक कोने में खबर छपी थी कि सिक्कम में कोरोना से मृत नरुलहोदा नामक व्यक्ति की लाश बिहार लाने में नीतीश कुमार ने निजी तौर पर दिलचस्पी ली थी.

इस खबर के सार्वजनिक होने के बाद कुछ मुसलमानों ने नीतीश की भूरी-भूरी तारीफ की थी. तारीफ करने वालों में कांग्रेस के नेता अरशद अब्बास आजाद भी शामिल थे. कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल के विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा है.विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस आम तौर पर नीतीश कुमार की सख्त आलोचना करते हैं. लेकिन नुरूल होदा की लाश बिहार लाये जाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका की कांग्रेसियों द्वारा तारीफ किया जाना अपवाद था.

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इस मामले की परतें अब खुलने लगी हैं. जनता दल युनाइटेड के वरिष्ठ नेता मेजर एकबाल हैदर खान ने इस मामले में कहा कि “बिहार के मुख्यमंत्री आदरणीय नीतीश कुमार सबको साथ ले कर सभी के लिए काम में विश्वास करते हैं. इसिए उन्होंने अपना फर्ज निभाया और किसी तरह का प्रचार करना उन्होंने जरूरी नहीं समझा”.

सिक्किम सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की थी उसके तहत कोरोना से होने वाली मौत के बाद लाश को जला दिया जाये. नीतीश कुमार ने पहल न की होती तो नुरुल होदा की लाश भी जला दी गयी होती

मेजर एकबाल ( Equbal Haidar) ने कहा कि 26 मई को किशनगंज के पोठिया निवासी नुरुल होदा की कोरना संक्रमण से सिक्किम में मौत हो गयी. सिक्किम सरकार ने एक गाइडलाइन जारी की थी उसके तहत कोरोना से होने वाली मौत के बाद लाश को जला दिया जाये. सिक्किम सरकार का यह फैसला कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के मकसद के तहत था. ऐसे में नुरुल होदा की मौत के बाद उनकी लाश को जला देने का फैसला प्रशासन ने लिया था. मेजर एकबाल हैदर का कहना है कि जब इस की खबर हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंची तो उन्होंने मुसलमानों के मजहबी अकीदे के सम्मान का महत्व समझा और खुद से पहल करके सिक्किम के मुख्यमंत्री से बात की . परिणाम स्वरूप नुरुल होदा के परिवार तक लाश पहुंच सकी. जिसके बाद 28 मई को उनकी आखिरी रसूमात इस्लामी तौर तरीके से अंजाम दी जा सकी.

नुरुल होदा किशनगंज के पोठिया के रहने वाले थे. इस लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के सांसद हैं. ऐसे में कांग्रेसी मुसलमानों को नीतीश की यह पहल पसंद आयी.

सूख चुकी है अखबारों में बहने वाली ‘विकास की गंगा’

जदयू नेता मेजर एकबाल हैदर खान ने कहा कि सेक्युलरिज्म का लाबाद ओढ़ कर सियासत करने वाले दलों ने नुरुल होदा के मामले में जुबान तक नहीं खोली. लेकिन हमारे नेता आदरणीय नीतीश कुमार ने मुसलमानों के अकीदे के सम्मान के लिए खुद पहल की. एक राज मिस्त्री का काम करने वाले नुरुल होदा कोई बड़े नेता या बड़ा व्यक्तित्व भी नहीं थे. लेकिन हमारे मुख्यमंत्री ने मुसलमानों के मजहबी अकीदे की रक्षा के लिए वो सब कुछ किया जो जरूरी था. मेजर एकबाल ने कहा कि जो लोग हमें भारतीय जनता पार्टी के साथ होने के नाम पर अपनी आलोचना का शिकार बनाते हैं, उन्हें जान लेना चाहिए कि हमारे नेता मुसलमानों के हक की रक्षा और उनके विकास के लिए कोई समझौता नहीं करते.

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