इर्शादुल हक, संपादक, नौकरशाही डॉट कॉम
बूढा शेर जब जोश में आता है तो अपने शिकार पर अचूक निशाना लगाता है. नीतीश ने तो आज भाजपा के दो नेताओं का एक साथ शिकार कर दिया. याद करिये कि यह भाजपा ही थी, जो सत्ता से बाहर रहते हुए नीतीश की बुजुर्गी पर, उनके मानसिक संतुलन पर सवाल किया था. आज उन्हीं नीतीश ने भाजपा को घुटने पर ला दिया.
जब नवम्बर की गुलाबी ठंड में नीतीश दिल्ली गये तो उन्हें अपमान का घूट पीना पड़ा. उन्हें मोदी से मिलना था. मोदी नहीं मिले. बदले में अमित शाह से मिलने को कहा गया. अमित शाह ने टरका दिया. फिर जेपी नड्डा से मिलने की बात हुई, वो भी नहीं हो पाई. और जब नीतीश दिल्ली से पटना बड़ी उदासी से लौट रहे थे तो इधर भाजपा कोटे के मंत्री दिलीप जायसवाल ने नीतीश की गैरमौजूदगी में एक तरफा फैसला करते हुए जमीन सर्वे का काम डेढ़ साल टाल दिया. नीतीश भौंचक थे. 20 सालों में भाजपा की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि नीतीश के बिना खुद इतना बड़ा फैसला कर दे. नीतीश ने तब से ही जायसवाल को निशाने पर ले रखा था.
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आज जायसाल मंत्रिपद से पैदल हो गये हैं. तर्क दे रहे हैं कि एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत इस्तीफा दिया.
अरे भाई एक व्यक्ति दो पद पर तो जेपी नड्डा खुद सवार हैं. केंद्र में मंत्री भी, राष्ट्रीय अध्यक्ष भी.
इससे पहले जेपी नड्डा गिड़गिड़ा रहे थे कि 11 महीने से कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ. कीजिए न नीतीशजी. नीतीश ने शर्त रख दी कि दिलीप जायसवाल को हटाओ तो कैबिनेट विस्तार होगा. नड्डा बेबस थे. जायसवाल को हटाना पड़ा.
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