पहले खारिज किया, फिर राहुल के बताए रास्ते पर चले पीएम

पहले खारिज किया, फिर राहुल के बताए रास्ते पर चले पीएम

12 फरवरी, 2020 को ही राहुल ने कहा था कि कोरोना खतरनाक है। पर सरकार ट्रंप के स्वागत में लगी रही। इस बार भी राहुल के सुझावों को खारिज किया, फिर चुपके से माना।

कुमार अनिल

यह पिछले साल से ही देखा जा रहा है कि जब भी राहुल गांधी कोरोना या लॉकडाउन से होनेवाली आर्थिक तबाही को लेकर कोई सुझाव देते हैं, तो उन्हे खारिज करने के लिए केंद्र के कई-कई मंत्री एक साथ सामने आते हैं। इस बार भी वही हुआ, राहुल ने केंद्र सरकार को तीन सुझाव दिए, केंद्र के मंत्रियों ने सबको खारिज कर दिया।

यहां तक कि मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए सुझाव दिए, तो प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया। जवाब दिया स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने। हर्षवर्द्धन ने मनमोहन सिंह के सारे सुझावों को खारिज कर दिया।

अब पहली बार सरकार राहुल के बताए रास्ते पर झिझकते हुए बढ़ती दिख रही है। राहुल गांधी और मनमोहन सिंह ने हाल में तीन सुझाव दिए। पहला, जब देश में टीका कम पड़ने लगा, तो राहुल ने कहा कि सरकार विदेश से टीके खरीदे। पहले तो राहुल के खिलाफ पूरी ट्रोल आर्मी भिड़ गई। उन्हें दवा कंपनियों का एजेंट तक बताया गया। फिर धीरे से सरकार ने विदेशी टीके के आयात की अनुमति दी।

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राहुल गांधी और मनमोहन सिंह ने दूसरा सुझाव दिया था इस बार कोविड की दूसरी लहर युवाओं को चपेट में ले रही है। इसलिए टीकाकरण की उम्रसीमा घटाई जाए। युवाओं को टीका दिया जाए। इसे भी पहले तो पूरी तरह खारिज किया गया, फिर सरकार ने 18 वर्ष तक के युवाओं के टीकारण का निर्देश दिया।

राहुल ने तीसरा सुझाव दिया कि प. बंगाल में प्रधानमंत्री अपनी रैली बंद करें। खुद राहुल ने कहा कि वे अपनी सारी रैलियां रद्द कर रहे हैं। इस मामले में भी भाजपा नेताओं ने राहुल पर खूब वार किया कि राहुल भगोड़े हैं। उनकी सभा में भीड़ नहीं हो रही हैं, इसलिए उन्होंने रैली कैंसिल की। गृहमंत्री अमित साह ने एक टीवी टैनल से बात करते हुए तंज कसा कि राहुल की कितनी रैलियां थीं? इसके बाद धीरे से आधे मन से राहुल के सुझाव स्वीकार कर लिया। प्रधानमंत्री अब बंगाल में सिर्फ 500 लोगों को संबोधित करेंगे।

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यहां प्रधानमंत्री से देश का नेशनल टीवी और अखबार यह पूछने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं कि 500 लोगों को संबोधित करने के लिए बंगाल जानाक्यों जरूरी है। प्रधानमंत्री के जाने से ही वहां पूरा महकमा व्यस्त हो जाता है। विशेष विमान लगते हैं। 500 लोगों को ही संबोधित करना है तो वे ऑनलाइन भी कर सकते हैं।

अब भी केंद्र ने राहुल का एक सुझाव नहीं माना है कि कोविड से जिनका काम बंद हुआ, उन्हें सीधे सरकार कैश में मदद करे। आज फिर दिल्ली से बिहार आनेवाले लोग परेशान हैं। हजारों लोग फिर पैदल चल पड़े हैं। क्या उनके लिए ट्रेनें नई चलाई जा सकती थीं?

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