गणतंत्र दिवस पर संविधान की उद्देशिका नहीं पढ़ी, तो जरूर पढ़ें

गणतंत्र दिवस पर संविधान की उद्देशिका नहीं पढ़ी, तो जरूर पढ़ें

गणतंत्र दिवस पर संविधान की उद्देशिका नहीं पढ़ी, तो जरूर पढ़ें। हैप्पी रिपब्लिक डे कहना अच्छा, लेकिन जरूरी है रिपब्लिक का अर्थ समझना।

गणतंत्र दिवस की सुबह से सोशल मीडिया पर तिरंगे के साथ हैप्पी रिपब्लिक डे खूब कहा जा रहा है। कहना भी चाहिए, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है भारतीय गणतंत्र क्या है, उसे समझना और उस पर अमल करना। इसके लिए संविधान की उद्देशिका पढ़ लें, तो उस एक पन्ने में ही संविधान की आत्मा है। देश के प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं, नागरिकों, पत्रकारों, लेखकों ने संविधान की उद्देशिका को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें हर धर्म-विश्वास में समानता, हर नागरिक को समान अधिकार, स्वतंत्रता का विश्वास दिलाया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने लिखा-संविधान गणतंत्र की गीता ही नहीं रामायण-क़ुरान-बाइबिल-गुरुग्रंथ…भी है। जड़ नहीं एक जीवन्त दस्तावेज है इसलिए जीवन की तरह लचीला-परिवर्तनशील-संवर्धनशील भी है। उसकी आत्मा सुरक्षित रखें तो देश-काल की ज़रूरतों के अनुरूप समाधान देता है। उसमें आस्था के बिना देश नहीं चल सकता। पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं। इस उम्मीद के साथ कि संवैधनिक मूल्यों और मर्यादाओं पर हमारा भारत टिका रहे।

स्वाति मिश्रा ने लिखा-सब झुट्ठो में “हैपी रिपब्लिक डे” बोल रहे हैं. दिल से संविधान का नाम वही ले रहा है, जो मार खा रहा है. बस वही गणतंत्र चाहता है. क्योंकि जिसके पास ताकत है, हाथ में डंडा-तलवार है, वो मस्जिदों के आगे भीड़ जुटाकर उत्पात कर रहा है, “उनकी मां का *” गाते हुए रिपब्लिक को ठेंगा दिखा रहा है।

सीमीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने संविधान की उद्देशिका की प्रति शेयर करते हुए लिख कि आज ही के दिन 1950 में हमने भारत का चरित्र सेकुलर स्वीकार किया। आज उस भावना और सेकुलर विचारों पर दृढ़ रहने का फिर से संकल्प लेने का दिन है। लेखिका सुजाता ने उन 15 महिलाओं के चित्र साझा किए हैं, जो संविधान सभा की सदस्य थीं और इसकी चर्चा-बहस में सक्रिय रहीं। महिलाओं की बराबरी और आजादी की बात उठाई।

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