SaatRang : आखिर ‘भक्त’ इस तस्वीर से नाराज क्यों हैं

SaatRang : आखिर ‘भक्त’ इस तस्वीर से नाराज क्यों हैं

कल भारत-पाकिस्तान में क्रिकेट मैच हुआ। भारत हार गया। ‘हिंदुत्व’ की संकीर्णता के कारण दुनिया में फिर देश की छवि हो रही खराब। कुछ मुस्लिम भी अति निराश।

‘भक्त’ एक बार फिर भारत भूमि की छवि खराब कर रहे हैं। कल भारत और पाकित्सान के बीच क्रिकेट मैच हुआ। भारत की हार को ‘हिदुत्व’ ने धर्म से जोड़ दिया। वे इस हार को इस तरह मान रहे हैं, जैसे हिंदू धर्म हार गया। ऐसे कई ‘भक्तों’ ने अंग्रेजी में ट्वीट किया, जिसे पूरी दुनिया देख रही है। पूरी दुनिया में ये लोग भारत की छवि खराब कर रहे हैं।

आज सुबह न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार राना अयूब ने भारतीय कप्तान कोहली और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के आपस में हंसते-बोलते तस्वीर शेयर की और लिखा-खेल का मूल अर्थ यही है।

राना ने एक पंक्ति में खेल भावना की सराहना की। खेल का मतलब ही है लोगों को, दुनिया को करीब लाना। प्यार बढ़ाना। राना अयूब की भावना की कई लोगों ने सराहना की, पर ‘ हिंदुत्व’ ( जो धर्म को राजनीति और राष्ट्रवाद से जोड़कर नफरत की राजनीति है) राना अयूब से नाराज हो गया।

राना का समर्थन करते हुए सैयद जलाल ने अंग्रेजी में ट्वीट किया- बिल्कुल! हम सब एक ही ग्रह के वासी हैं, पड़ोसी हैं, हमारी संस्कृति और मूल्य लगभग समान हैं। वास्तव में दोनों देश पहले सदियों तक एक ही रहे हैं।

सैयद जलाल की बातों का दुनिया के हर लोकतांत्रित देश के नागरिक समर्थन करेंगे। इतनी अच्छी और तथ्यपूर्ण बात से कई ‘भक्त’ नाराज हो गए। आप जलाल के ट्वीट के जवाब देखें, तो यहां कई ऐसे हैं, जो कह रहे हैं कि हमारी संस्कृति और हमारे मूल्य समान नहीं हैं। ये तथाकथित भक्त खेल में धर्म और नफरत की राजनीति घुसा रहे हैं।

ये तथाकथित भक्त वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति को खारिज कर रहे हैं, जिसका अर्थ है पूरी पृथ्वी के जीव एक परिवार की तरह हैं। स्वामी विवेकानंद जिस ब्रह्म की बात करते हैं, उसका अर्थ ही है फैलना, बढ़ना। हर जीव में उसी सत्य का अंश है। ये भक्त विवोकानंद के भी खिलाफ खड़े हो जाते हैं। ये फैलने के बजाय सिकुड़ रहे हैं। संकीर्णता फैला रहे हैं।

ऐसा नहीं कि सिर्फ तथाकथित भक्त ही नाराज हैं और खेल को धर्म से जोड़ रहे हैं। सैयद जलाल के ट्वीट के जवाब में कई मुस्लिम कह रहे हैं कि हमारी संस्कृति समान नहीं है।

कांग्रेस की नेता अलका लांबा के जवाब में जकाउल्कलाह पठान ने लिखा कि कोहली की जगह कोई मुस्लिम गले मिलता, तब देखते। लांबा ने कोहली और पाक खिलाड़ी की हंसते हुए तस्वीर शेयर करके लिखा था-बस यह एक सच्चाई-बाकी सब राजनीति। जकाउल्लाह साहब की मुश्किल ये है कि वे अति निराशा में डूबे हैं। वे यह नहीं देख पा रहे कि कट्टरता सिर्फ दूसरे धर्म के प्रति नफरत नहीं फैलाती, वह खुद अपने धर्म के प्रगतिशील विचारों पर भी हमला करती है। गांधी की हत्या करनेवाला गोडसे था। और आज कोहली कप्तानी छोड़ो भी ट्रेंड कराया जा रहा था। अगर राना अयूब का भक्त मजाक उड़ाया रहे हैं, तो अलका लांबा पर भी वे बरस रहे हैं।

कट्टरता किसी भी धर्म की हो, वह लोकतंत्र और भाईचारे के खिलाफ होती है। खैर, अच्छी बात यह है कि नफरत के खिलाफ प्यार की शक्तियां भी मजबूती से अपनी बात कह रही हैं। कोहली की सराहना भी हो रही है। पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भी सराहना करनी होगी कि जीत ने उन्हें अहंकार से दूर रखा। जीत में विनम्रता और हार में जीतनेवाले के अच्छे खेल की सराहना करने का दिल होना होना चाहिए। भारत और पाकिस्तान दोनों टीमों ने यही भावना दिखाई है।

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