SaatRang : तिवारी जी को महंगाई नहीं दिखती, यादव जी परेशान

SaatRang : तिवारी जी को महंगाई नहीं दिखती, यादव जी परेशान

यह शोध का विषय है कि क्या महंगाई की मार भी धर्म और जाति देखकर पड़ रही है? क्यों कोई खास जाति महंगाई से परेशान है, जबकि दूसरी जातियों को कोई फर्क नहीं पड़ता?

राजीव रंजन यूपी में महंगाई पर बात करते। साभार न्यूज 24

कल मैं न्यूज 24 के राजीव रंजन का कार्यक्रम माहौल क्या है देख रहा था। कल ही आंबेडकरनगर में बसपा के दो बड़े नेता सपा में शामिल हुए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सभा थी। राजीव रंजन सभा स्थल से कुछ दूर लोगों से पूछ रहे थे कि माहौल क्या है?

राजीव रंजन का यह वीडियो यू-ट्यूब पर है, आप भी देख सकते हैं। एक चाय दुकान पर वे महंगाई के बारे में पूछते हैं, तो एक बुजुर्ग कहते हैं, महंगाई कहां है? फिर कहते हैं महंगाई तो शुरू से है। राजीव पूछते हैं कि इतनी महंगाई कभी थी, तो जवाब मिलता है कि इतनी पैदावार भी तो नहीं थी। राजीव नाम पूछते हैं, तो बुजुर्ग नाम बताते हैं-तिवारी। राजीव कुछ क्षण देखते रह जाते हैं। फिर कहते हैं कि हम पहले ही समझ गए थे कि आप तिवारी, उपाध्याय ही होंगे।

उसी चाय दुकान में यादव जी भी हैं, जिनके लिए महंगाई बहुत परेशान करनेवाली है। दूसरी पिछड़ी जाति के लोग भी हैं, जिन्हें महंगाई बहुत अधिक लगती है। हालांकि राजीव के वीडियो में एक उपाध्याय ऐसे भी हैं, जो महंगाई को बड़ा मुद्दा मानते हैं, लेकिन वे सपा के कार्यकर्ता हैं।

इस प्रकार महंगाई जाति-धर्म ही नहीं, दल के हिसाब से भी किसी को कड़वी, किसी को सामान्य लगती है। भाजपा के समर्थकों को महंगाई नहीं दिखती। यूपी के एक विधायक कह चुके हैं कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है, उस हिसाब से महंगाई बिल्कुल ही नहीं है।

आखिर क्यों 220-230 रुपए लीटर सरसों तेल खरीदने पर भी किसी को महंगाई नहीं महसूस होती और कोई दिवाली में इस बार कम तेल में कम दीए जलाने पर मजबूर हुआ? एक कारण तो अमीरी-गरीबी है। जो अमीर हैं, उनके लिए सरसों तेल की कीमत परेशान करनेवाली नहीं है। लेकिन ऐसे अमीर 100 में 20 ही होंगे। अधिकतर ऐसे लोग हैं, जो साधारण हैं। सवाल तो यही है कि इन साधारण-मध्यम लोगों में भी किसी को महंगाई से परेशानी है, किसी के लिए कोई मुद्दा ही नहीं है।

न्यू इंडिया में महंगाई भौतिक से ज्यादा भावनात्मक प्रश्न बन गई है। आप किसी के खिलाफ नफरत से भरे हों, तो आपको होश नहीं रहेगा कि आपने आज खाना खाया भी या नहीं। आप जितना ही नफरत, घृणा से भरे होंगे, आप अपनी फटेहाली को उतना ही भूल जाएंगे। इसके विपरीत अगर आप प्यार से भरे हैं, आप करुणा से भरे हैं, मैत्रीभाव है, तो आपको घर, परिवार, बच्चे, पड़ोसी सहित सबकी परेशानी दिखेगी। अपवादों को छोड़ दीजिए, तो आप जानते हैं कि सरकारी स्कूल में पढ़कर आपका बच्चा डॉक्टर नहीं बन सकता। बच्चे को अच्छी पढ़ाई, अच्छी कोचिंग देने की आप चिंता करेंगे। आपको महंगाई परेशान करेगी। इसके विपरीत आप नफरत से लबालब हों, तो महंगाई की याद ही नहीं रहेगी।

साधारण लोगों को भी महंगाई महसूस नहीं होने की एक दूसरी वजह भी हो सकती है। आपको किसी नशे की सूई दे दी जाए, तो आप होश खो देंगे। एक समय था, जब ऑपरेशन से पहले मरीज को शराब पिलाई जाती थी। शराब के नशे में आदमी को दर्द महसूस नहीं होता था। अब तो बेहोश करने की आधुनिक दवाइयां आ गई हैं। एक डोज में ही आदमी बेहोश। बेहोश करने के काम में दिन-रात वाट्सएप यूनिवर्सिटी लगी है।

SaatRang : बुद्ध के उल्टा अतीतजीवी क्यों हैं नीतीश, किसकी हानि?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*