शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, राजद ने घेरा

शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, राजद ने घेरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी पर समाज सुधार यात्रा कर रहे हैं, उधर देश के सर्वोच्च न्यायलय ने इस निर्णय पर ही सवाल उठा दिया। राजद ने कर दी किरकिरी।

आज राजद ने सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का हवाला देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जबरदस्त तरीके से घेर लिया। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी का अंश सोशल मीडिया में साझा किया। इसमें मुख्य न्यायाधीश ने बिहार में शराबबंदी को बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा-उन्होंने पहले भी इस मुद्दे को हाइलाइट किया था, लेकिन शराबबंदी कानून के परिणामों की कोई समीक्षा नहीं की गई। कोई भी कानून बनाते समय उसके संभावित परिणामों पर विचार किया जाना चाहिए। इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया। इसी का नतीजा है कि कोर्ट पर मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। हाईकोर्ट में बेल पिटिशन की भरमान हो गई है। एक सामान्य बेल की सुनवाई के लिए एक साल तक इंतजार करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नसीहत भी दी। कहा- कोई भी कानून बनाने से पहले संबंधित सभी पक्षों की राय ली जानी चाहिए। इसके लिए स्टैंडिंग कमिटियां होती हैं। लगता है, इसकी भी उपेक्षा की गई।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का समर्थन करते हुए प्रदेश के सबसे बड़े दल राजद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ट्वीट किया-सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बिहार के शराबबंदी कानून को दूरदर्शिता की कमी वाला निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि इसके कारण हाईकोर्ट में केसों का दबाव बढ़ा है, बेल लेने के लिए एक साल का इंतज़ार करना पड़ता है। फिर भी नीतीश कुमार व्यवस्था सुधार भूल किसका समाज सुधार कर रहे है?

दो दिन पहले एक डॉक्टर अपने घर के भीतर शराब पी रहे थे। पुलिस घर के भीतर पहुंच गई और गिरफ्तार कर लिया। हाल यह है कि एक तरफ मुख्यमंत्री शराबबंदी का प्रचार कर रहे हैं, दूसरी तरफ रोज बारी मात्रा में शराब जब्त हो रही है। यहां तक कि जिस पुलिस को इसे लागू करना है, वही कई स्थलों पर शराब बेचती पकड़ी गई है।

शराब के दो लाख केस से दबी सरकार ने उठाया यह कदम

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