इर्शादुल हक, संपादक, नौकरशाही डॉट कॉम

डोनाल्ड ट्रम्प पिछले तीन महीने से नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने पर तुला है. उसने अब तक 31 बार कह डाला कि भारत-पाक युद्ध उसने रुकवाया. ट्रम्प ने यह दावा आज तब फिर से कर दिया जब पीएम मोदी ने कल सदन में दावा किया कि भारत-पाक युद्द किसी तीसरे देश के कहने पर नहीं रुका.

राहुल यह चुनौती दे गये थे कि मोदी को हिम्मत है तो वह कहें कि ट्रम्प ने युद्ध नही  रुकवाया. वह झूठा है. पर मोदी ने ट्रम्प का नाम तक नहीं लिया. उलटे उनके इस बयान के बाद फिर से ट्रम्प ने वही दावा दोहरा दिया.

अब एक कदम आगे

अब तो ट्रम्प ट्रेड डील पर भारत को धमकी तक देने लगा है. उसने आज कहा कि भारत पर वह 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगायेगा. ट्रम्प के इस तरह के तानाशाही फरमान से भारत की गरिमा, स्वतंत्रता और संप्रभुता को ठेस पहुंचती है. इससे भारतीयों में निराशा और हतोत्साह की भावना पनपती है. आखिर नरेंद्र मोदी इस पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं. हम एक सौ 44 करोड़ का देश हैं. हमारी अर्थव्यवस्था बहुत विशाल है. हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में  हैं. फिर भी ट्रम्प हमारे साथ एक अपाहिज देश की तरह व्यवहार क्यों कर रहा है ?

राहलु गांधी ने इस पर कुछ संशय जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि देखते जाइय ट्रम्प अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करेगा.

अडानी के फ्राड का मामला

क्या इसके पीछे गौतम अडाणी द्वारा अमेरिका मे कथित फ्राड के आरोप तो कारण नहीं है. याद करिये के पिछले साल नवम्बर में अमेरिकी संस्था ने आरोप लगाया था कि गौतम अडाणी की अडाणी  ग्रीन  नामक कम्पनी ने अमेरिकी निवशकों के साथ धोखाधड़ी की. 250 मिलयन डॉलर की रिश्वतखोरी के आरोप लगे. यह मामला अमेरिकी अदालत में लम्बित है.

तो क्या मोदी जी के मित्र की कारिस्तानी देश पर भारी तो नहीं पड़ रही है ?

हालांकि इस मामले में ताजा अपडेट यह भी बताया जाता है कि गौतम अडाणी ने उस घटना क्रम के बाद अमेरिका में दस बिलियन डालर निवेश का ऐलान किया है. क्या यह निवेश भी डोनाल्ड ट्रम्प के भारत से ब्लैकमेलिंग के नतीजों से जुडा है ?

इस तरह के अनेक सवाल हैं जिसका जवाब देश को जानने का हक है. पर इस पर न तो हमारी सरकार कुछ साफ कर रही है और न ही प्रधान मंत्री मोदी ब्लैकमेलर ट्रम्प को मुंहतोड़ जवाब दे पा रहे हैं.

 

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