यूपी में ओवैसी से भी कम सीटों पर लड़ेगा JDU, उतरेंगे 51 प्रत्याशी

यूपी में ओवैसी से भी कम सीटों पर लड़ेगा JDU, उतरेंगे 51 प्रत्याशी

भाजपा के साथ बिहार में सरकार चला रहा जदयू यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगा। जदयू ने भाजपा से बात करने की कोशिश की, पर भाजपा ने नहीं दिया भाव, तो अकेले मैदान में।

कई दिनों से जारी ऊहापोह आज खत्म हो गया। जदयू ने आज यूपी चुनाव में 51 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी। इससे पहले पार्टी ने भाजपा से बात करने की कोशिश की। जदयू ने अपने केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को भाजपा से बात करने की जिम्मेदारी दी थी, पर भाजपा ने बिल्कुल भाव नहीं दिया। इसके बाद आज जदयू ने यूपी चुनाव अकेले दम पर लड़ने का एलान कर दिया।

यूपी में ओवैसी ने 100 सीटों पर अकेले प्रत्याशी उतारने का एलान किया है। जदयू ने 51 पर उम्मीदवार देने की घोषणा की है। स्पष्ट है कि जदयू की ताकत औवैसी से भी कम है। झारखंड विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों ने अलग-अलग अकेले चुनाव लड़ा था। जदयू ने झारखंड की कुल 81 सीटों में 40 पर प्रत्याशी दिए थे, और उसे महज 0.7 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 11 सीटों पर प्रत्याशी दिए थे और उसे इन सीटों पर 1.16 प्रतिशत वोट मिले। पार्टी को डुमरी में सर्वाधिक 24,132 वोट मिले थे। झारखंड में नोटा पर1.36 प्रतिशत वोट मिले थे।

यूपी में जदयू के 51 प्रत्याशियों में से कोई जीत हासिल कर पाए, ऐसा संभव नहीं दिखता, पर एक बात तय है कि जदयू के चुनाव लड़ने से भाजपा को नुकसान होगा। चर्चा इस बात की भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रचार के लिए यूपी जाएंगे। ऐसा हुआ, तो भाजपा को ज्यादा नुकसान होगा। पूर्वी यूपी में कुर्मी जाति का आबादी अच्छी है। बिहार से निकट होने के कारण यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अपनी बिरादरी में लोकप्रियता भी है। अब देखना है कि यूपी चुनाव में जदयू किन मुद्दों पर जोर देता है। संभव है वह वहां जातीय जनगणना, पिछड़ों को गक की बात करेगा। अगर वह हिंदुत्व के खिलाफ स्टैंड लेता है, तो भाजपा की परेशानी ज्यादा बढ़ेगी।

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