योगेंद्र यादव ब्राह्मण वर्चस्व बोले, चित्रा त्रिपाठी गाली-गलौज पर उतरीं

टीवी एंकर चित्रा त्रिपाठी ने कहा कभी देश में 10 मुख्यमंत्री ब्राह्मण थे, तो योगेंद्र यादव ने ब्राह्मण वर्चस्व पर उठाया सवाल। अब चित्रा गाली-गलौज पर उतरीं।

टीवी चैनल आजतक में चर्चा के दौरान एंकर चित्रा त्रिपाठी ने कहा कि आजादी के बाद देश के 10 राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण थे, संसद में आधे सदस्य ब्राह्मण थे, इस पर चर्चा में शामिल विद्वान योगेंद्र यादव ने कहा कि यह कोई गर्व का विषय नहीं है कि कभी 10 राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण थे। जिसकी आबादी देश में दो-तीन प्रतिश हो और हर क्षेत्र में वह काबिज हो, तो यह गर्व का नहीं चिंता का विषय होना चाहिए। लोकतंत्र में स्वाभाविक होता है कि जैसे-जैसे लोकतंत्र का विस्तार होता है, छोटे से अभिजात्य वर्ग का शिकंजा ढीला पड़ता जाता है। जो समाज की वास्तविक तस्वीर है, वह सत्ता में आने लगती है। सुनिए योगेंद्र यादव ने क्या कहा-

इसके बाद चित्रा त्रिपाठी ने ट्वीट करके योगेंद्र यादव के सवालों पर गंभीर चर्चा के बजाय व्यक्तिगत हमले किए। योगेंद्र यादव को कुंठित, लालची तक कहा। उन्होंने कहा-आपकी व्यक्तिगत कुंठा को समझा जा सकता है @_YogendraYadav जी. मुझे आपके साथ सहानुभूति है. पहले अन्ना आंदोलन में अपने आपको कामयाब करने की कोशिश, फिर पद नहीं मिलने पर केजरीवाल से अदावत, फिर स्वयंभू बनने की कोशिश स्वराज आंदोलन से, अंततोगत्वा राहुल गांधी की शरण में ( जो एक जनेऊधारी ब्राह्मण हैं) मैं ये नहीं कहूँगी कि आप अतिपाखंडी हैं. मगर अपनी महत्वाकांक्षा के लिए मीठी ज़ुबान से समाज को विभाजित करना देश के साथ ग़द्दारी होती है. मेरा सवाल काट कर मुझे ट्रोल कराने के लिए धन्यवाद. ईश्वर आप पर रहम करे।

योगेंद्र यादव ने भी जवाब दिया। उन्होंने कई सवाल उठाए और कहा-अरे,आप तो सड़क छाप गाली गलौज पर उतर आयीं! सवाल का जवाब आरोप और जन्मपत्री से वही लोग देते हैं जिनके पास तर्क न बचे हों। अगर यूरोप अमरीका के टीवी पर इस तरह की बात कही जाती ऐसे “white supremacism” के लिए एंकर ही नहीं पूरी चैनल को माफ़ी मांगनी पड़ती। खैर, कुछ और सवाल व एक प्रस्ताव: १. क्या आज तक और इंडिया टुडे का एग्जिट पोल यह नहीं दिखाता कि कर्नाटक में कांग्रेस को पिछड़ों के वोट में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई? फिर कांग्रेस की जीत को पिछड़ी जातियों के समीकरण से जोड़ने की उतावली क्यों? आखिर यह मानने से परहेज क्यों हैं कि बीजेपी अपने निकम्मेपन और भ्रष्टाचार के कारण हारी? २. अगर यह विश्लेषण करना भी था तो कर्नाटक के सन्दर्भ में यह उद्घोष क्यों जरूरी था कि एक जमाने में देश में १३ ब्राह्मण मुख्यमंत्री और एक चौथाई ब्राह्मण सांसद थे? ३. आपने शो में कांग्रेस की प्रवक्ता के बार-बार यह सही सवाल पूछा कि उनकी सरकार ने 2011 के सर्वे की रिपोर्ट जारी क्यों नहीं की। लेकिन मेरे दो बार याद दिलाने के  बाद भी बीजेपी के प्रवक्ता से यह क्यों नहीं पूछा कि उन्होंने 2010 में जाति जनगणना और 2018 में ओबीसी जनगणना का समर्थन क्यों किया था? ४. मैंने आपका कौनसा सवाल काटा है? “आज तक” ने जो क्लिपिंग जारी की, बस उसे फॉरवर्ड किया है। इतना झूठा आरोप क्यों? ५. अगर आप मेरे बारे में यह राय रखती हैं तो शो में मुझे “वरिष्ठ”, “पढ़ा-लिखा” और “आदरणीय” वगैरा क्यों बता रही थीं? आप शो में झूठ बोलती हैं? मुझे विश्वास है कि इन सब सवालों पर ‘आज तक’ में मुझसे चर्चा करने का समय निकलेंगी। मुझे इंतज़ार रहेगा।

वरिष्ठ पत्रकार और जनसत्ता के पूर्व संपादक ओम थानवी ने कहा-टीवी पर होने वाली बहस, कहासुनी को tackle करना, निभा ले जाना पत्रकार/ऐंकर का कौशल माना जाता है। लेकिन स्टूडियो से बाहर आकर मेहमान संभागी — जो विद्वान हैं और संजीदा भी — के प्रति यह शब्दावली अशोभनीय है। यह भाषा नहीं है, गाली-गलौज है। अस्वीकार्य और तिरस्कार के योग्य।

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By Editor