योगी के खिलाफ बड़ा गेमप्लान तो नहीं! शुरू हुई हाईलेवल मीटिंग

योगी के खिलाफ बड़ा गेमप्लान तो नहीं! शुरू हुई हाईलेवल मीटिंग

इधर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री से मिल कर विदा हुए, उधर प्रधानमंत्री आवास पर हाईलेवल मीटिंग शुरू हुई। यूपी की गुत्थी और भी उलझी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री दो दिनों तक दिल्ली में रहे। गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले। अमित शाह के साथ योगी की मीटिंग का जो फोटो मीडिया के लिए जारी हुआ, उसमें अमित शाह तनावमुक्त आराम से बैठे हैं, पर योगी कुर्सी में आगे खिसक कर बैठे दिखे। यह फोटो योगी आदित्यनाथ के ट्विटर हैंडल पर नहीं है। आज भी उनके ट्विटर हैंडल के मुख्य फोटे में सिर्फ वे ही हैं। योगी की अलग-अलग मुलाकातों को शिष्टाचार मीटिंग बताया गया, जबकि सभी समझते हैं कि मीटिंग का उद्देश्य क्या था।

आज तेजी से बदलते घटनाक्रम में जैसे ही योगी प्रधानमंत्री से मिल कर वापस हुए, उसके कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री आवास पर हाईलेवल मीटिंग शुरू हुई। मीटिंग में खुद प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह और पार्टी अध्यक्ष नड्डा शामिल हैं। माना जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ से अलग-अलग क्या बात हुई, उस पर मंथन किया जा रहा है।

इतना तो अब सब मान चुके हैं कि यूपी में भाजपा संकट में है। भाजपा को मालूम है कि अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव में उसके लिए जीत की राह कठिन है। अगर यूपी में भाजपा हार जाती है, तो फिर नरेंद्र मोदी के लिए 2024 में वापसी भी कठिन हो जाएगी।

आज भी सोशल मीडिया में योगी समर्थक मोदी के बाद योगी का नारा दे रहे हैं, पर उसमें अब पहले वाली बात नहीं रही। तो क्या योगी अब मोदी-शाह के आगे झुक गए हैं ? अभी यह कहना भी आसान नहीं, क्योंकि योगी को मालूम है कि एक बार पीछे हट जाने पर फिर उनके लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी तक जाने का रास्ता सदा के लिए बंद हो जाएगा। यही नहीं, मुख्यमंत्री के बतौर भी वे निर्णायक नहीं रह जाएंगे।

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जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर नेशनल टीवी के बड़े हिस्से ने जिस तरह इसे ऐतिहासिक घटना बताया, उससे स्पष्ट है कि भाजपा ब्राह्मण वोट को लेकर परेशान है। इस बीच कई पिछड़े नेताओं ने भाजपा की आलोचना की है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर ने यहां तक कह दिया कि भाजपा डूबती हुई नाव है। वे उसमें नहीं सवार होंगे।

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योगी पूर्व आईएएस अरविंद शर्मा को सत्ता में कितनी हिस्सेदारी देते हैं, यह भी देखना हेगा। वैसे अब माना जा रहा है कि योगी के हाथ में यूपी की सारी सत्ता नहीं रहेगी। अब देखना है योगी किस तरह अपनी शाख बचाए रह पाते हैं।

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