बिलकिस बानो केस : दुष्कर्म के दोषियों को SC से फिर झटका

बिलकिस बानो केस : दुष्कर्म के दोषियों को SC से फिर झटका

बिलकिस बानो केस : दुष्कर्म के दोषियों को SC से फिर झटका। रेप के लिए सजा पा चुके दोषियों को करना ही होगा सरेंडर। अब जेल जाने से बचने का कोई उपाय नहीं।

बिलकिस बानो गैंगरेप कांड में सजा पूरी होने से पहले जेल से बाहर आ चुके सभी दोषियों को अब जेल जाना ही होगा। इन दोषियों ने जेल जाने से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कहा था कि इन्हें जेल न भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके तर्कों को खारिज कर दिया और कहा कि सभी दोषियों को जेल में सरेंडर करना होगा। दोषियों ने अपील की थी, जिसमें किसी ने घर में शादी, किसी ने घर में बुजुर्ग की सेवा और किसी ने बेटे को सेटल करने का तर्क दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने फिर से जेल भेजने की अंतिम तारीख 21 जनवरी तय कर रखी है।

मालूम हो कि 11 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन दोषियों को सजा पूरी होने से पहले ही जेल से रिहा करने के गुजरात सरकार के निर्णय को गौरकानूनी बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने दो हफ्ते में सारे दोषियों को फिर से जेल भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद दोषी फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान बिलकिस बानो से गैंगरेप और उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या के मामले में सरेंडर करने के लिए समय बढ़ाने के अनुरोध संबंधी 11 दोषियों की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि दोषियों की ओर से बताए गए कारणों में कोई दम नहीं है।

याद रहे 2002 में घटना के समय बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच माह की गर्भवती थीं। उस दौरान गुजरात में भड़के दंगों के दौरान बानो के साथ गैंगरेप किया गया था। दंगों में मारे गए उनके परिवार के 7 सदस्यों में उनकी 3 साल की बेटी भी शामिल थी। दोषी सरेंडर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं और फैसले पर फिर से विचार करने की अपील कर सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से मामले को गंभीरता से लिया है, उससे लगता नहीं कि कोर्ट से भविष्य में उन्हें राहत मिलने वाली है।

बिलकिस बानो के दोषियों को सरेंडर करने के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने लिखा है कि इन दरींदों के प्रति कोई सहानुबूति नहीं हो सकती। पत्रकार अजीत अंजुम ने लिखा है इन दरिंदों को एक दिन भी सलाखों से बाहर रहने का हक नहीं है।

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