भाजपा को झटका, HC का 65 प्रतिशत आरक्षण पर रोक से इनकार

भाजपा को झटका, HC का 65 प्रतिशत आरक्षण पर रोक से इनकार

भाजपा को झटका, HC का 65 प्रतिशत आरक्षण पर रोक से इनकार। पहले भी भाजपा की शह पर सुप्रीम कोर्ट में गया था मामला। अटार्नी जनरल तक पहुंचे थे।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा राज्य में पिछड़ों, अतिपिछड़ों, अजा-अजजा के आरक्षण को बढ़ा कर 65 प्रतिशत करने के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नए आरक्षण पर रोक से इनकार करते हुए जनवरी में सुनवाई की तारीख दी है। मालूम हो कि भाजपा सांसद सुशीम मोदी हाल में कह चुके हैं कि बिहार में आरक्षण को 65 प्रतिशत करने के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। संविधान की 9 वीं अनुसूची में शामिल करने के बाद भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। उनके इस बयान के बाद पटना हाईकोर्ट में नए आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर हुए। बाद में इसी मामले पर एक और भी याचिका दायर हुई।

पटना हाईकोर्ट के आरक्षण पर रोक से इनकार को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि राज्य की महागठबंधन सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजद और जदयू के नेताओं ने पटना हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से 12 जनवरी, 2024 तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस के विनोद चंद्रन कर रहे थे।

दरअसल बिहार में आरक्षण को बढ़ा कर 65 प्रतिशत करने पर महागठबंधन के दलों में खुशी है और वे इसे राज्य में हर सभा-कार्यक्रम में मुद्दा बना रहे हैं, जबकि भाजपा कह रही है कि वह आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन जश्न मनाने से बच रही है। यही नहीं, उसके नेता सुशील मोदी यहां तक कह चुके हैं कि 65 प्रतिशत आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इससे उनका दृष्टिकोण साफ हो जाता है। महागठबंधन के दलों का कहना है कि अगर भाजपा आरक्षण के पक्ष में है, तो केंद्र सरकार उसी की है। केंद्र सरकार से इस आरक्षण को 9 वीं अनुसूची में शामिल करा कर दिखाए। इससे पहले भी जाति गणना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

अब पटना हाईकोर्ट के इस निर्णय से भाजपा को बढ़ा झटका लगा है। मालूम हो कि 2024 लोकसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बनेगा, जिससे भाजपा को बड़ा नुकसान होने के कयास लगाए जा रहे हैं। राज्य के पिछड़े और अतिपिछड़ें तथा दलितों का जो हिस्सा भाजपा के साथ है, वह उसका साथ छोड़ सकता है।

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