विप की 11 सीटों पर चुनाव, किसे मिलेगी कुर्सी, किसे मिलेगा वनवास

विप की 11 सीटों पर चुनाव, किसे मिलेगी कुर्सी, किसे मिलेगा वनवास

विप की 11 सीटों पर चुनाव, किसे मिलेगी कुर्सी, किसे मिलेगा वनवास। नीतीश कुमार, शाहनवाज, मंगल पांडेय, राबड़ी देवी सहित कई नेताओं का कार्यकाल हो रहा पूरा।

बिहार विधान परिषद की 11 सीटें खाली हो रही हैं। मई के पहले हफ्ते में ही खाली हो रही हैं। इसलिए चुनाव अप्रैल में ही होने की संभावना है। इन 11 सीटों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा जदयू के संजय झा, खालिद अनवर तथा रामेश्वर महतो, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के अलावा राजद के रामचंद्र पूर्वे, भाजपा के सैयद शाहनवाज, मंगल पांडेय तथा संजय पासवान, हम के संतोष कुमार सुमन तथा कांग्रेस के प्रेमचंद मिश्रा। बड़ा सवाल यह है कि बदले हुए राजनीतिक परिदृष्य में किस नेता को कुर्सी मिलेगी और किस नेता को वनवास में जाना होगा।

विधान परिषद के लिए 11 सीटों का चुनाव होगा। एक सीट के लिए 22 विधायकों की जरूरत होगी। नए समीकरण में एनडीए और इंडिया गठबंधन को पांच-पांच सीटों पर जीत आसानी से मिल जाएगी। एक सीट के लिए दोनों गठबंधनों में मुकाबला होगा।

जिन नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें सिर्फ दो ऐसे नेता हैं जो फिर से रिपीट होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा राबड़ी देवी फिर से विप परिषद के लिए प्रत्याशी होंगे और इनका जीतना भी तय है। हम के संतोष सुमन मंत्री बनाए गए हैं। उनका फिर से चुना जाना जरूरी है। जदयू के संजय झा को पार्टी राज्यसभा भेज सकती है। जदयू को दो ही सीटें मिलेंगी, जबकि उनके चार विप सदस्य हैं। स्पष्ट हैं इनमें किसी को वनवास में जाना पड़ सकता है। भाजपा के तीन प्रत्याशी जीत सकते हैं और उसके तीन नेताओं का ही कार्यकाल पूरा हो रहा है। अब देखना होगा कि पार्टी किसे टिकट देती है और किसे वनवास पर भेजती है। शाहनवाज को लोकसभा चुनाव लड़ाया गया, तो उन्हें रिपीट नहीं किया जाएगा।

इंडिया गठबंधन के भी पांच प्रत्याशी आराम से जीत सकते हैं। इनमें तीन राजद के होंगे। एक सीट कांग्रेस को मिल सकती है और एक सीट वामपंथ को मिल सकता है।

विधानसभा में विभिन्न पार्टियों की स्थिति देखें, तो एनडीए में भाजपा के 78 विधायक हैं। जदयू के 45 विधायक हैं और हम के चार विधायक। एनडीए को छठे सीट की लिए मतों का जुगाड़ करना पड़ेगा। उधर इंडिया गठबंधन में राजद के 79 विधायक हैं। कांग्रेस के 19 और वामपंथ के पास 16 विधायक हैं। इनमें माले के 12, सीपीएम तथा सीपीआई के दो-दो विधायक हैं।

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