विशेष राज्य का दर्जा : नीतीश 2011 जैसा खड़ा करेंगे बड़ा आंदोलन

विशेष राज्य का दर्जा : नीतीश 2011 जैसा खड़ा करेंगे बड़ा आंदोलन

विशेष राज्य का दर्जा : नीतीश 2011 जैसा खड़ा करेंगे बड़ा आंदोलन। कहा जाति गणना के बाद दलितों-पिछड़ों के विकास के लिए केंद्र दे विशेष दर्जा।

नीतीश कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में बिहर को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की गई। केंद्र की मोदी सरकार से से मांग का प्रस्ताव पारित किया गया। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तीन दिनों में दो बार केंद्र से मांग कर चुके हैं। आज उन्होंने इस संबंध में लंबा ट्वीट भी किया और कहा कि जाति गणना के बाद दलितों, अतिपिछड़ों तथा पिछड़ों के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इन्हें पूरा करने में 2 लाख 50 हजार करोड़ की राशि व्यय होगी। इसे पूरा करने में राज्य सरकार को पांच साल लगेंगे। अगर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा केंद्र सरकार दे, तो दलितों-पिछड़ों की योजनाएं पांच साल के बजाय डेढ़ से दो साल में पूरी हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति आधारित गणना में सभी वर्गों को मिलाकर बिहार में लगभग 94 लाख गरीब परिवार हैं। सभी परिवार के एक सदस्य को रोजगार के लिए दो लाख रूपये तक की राशि किश्तों में उपलब्ध करायी जायेगी। 63,850 आवासहीन एवं भूमिहीन परिवारों को जमीन क्रय के लिए दी जा रही 60 हजार रूपये की राशि की सीमा को बढ़ाकर 1 लाख रूपये कर दिया गया है। साथ ही इन परिवारों को मकान बनाने के लिए 1 लाख 20 हजार रूपये दिये जायेंगे। जो 39 लाख परिवार झोपड़ियों में रह रहे हैं उन्हें भी पक्का मकान मुहैया कराया जायेगा जिसके लिए प्रति परिवार 1 लाख 20 हजार रूपये की दर से राशि उपलब्ध करायी जायेगी। सतत् जीविकोपार्जन योजना के अन्तर्गत अत्यंत निर्धन परिवारों की सहायता के लिए अब 01 लाख रूपये के बदले 02 लाख रूपये दिये जायेंगे। इन सभी योजनाओं पर दो लाख 50 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा को फंसानेवाली चाल चल दी है। भाजपा नेता अभी से विशेष राज्य के दर्जे की मांग का विरोध करने लगे हैं। बुधवार को भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा कि विशेय़ दर्जा मरा हुआ घोड़ा है। वे ऐसे बयान देकर बिहार के एक बड़े वर्ग को नाराज करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यही नैरेटिव बनाएंगे कि भाजपा दलित-पिछड़ा विरोधी है, बिहार के विकास की विरोधी है इसीलिए वह विशेष राज्य का दर्जा नहीं दे रही है। उन्होंने हाल में एक कार्यक्रम में कहा था कि इस मांग के समर्थन में पूरे प्रदेश में अभियान चलेगा। वे खुद इस अभियान को राज्य भर में जनता के बीच ले जाएंगे।

नीतीश का यह दांव 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिहार विरोधी साबित करने वाला दांव है। नीतीश बहस छेड़ेंगे कि बिहार को विकसित राज्य बनाना है, तो इसके अलावा क्या रास्ता है। वे बताएंगे कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने से केंद्र से विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि का 90 प्रतिशथ अनुदान के रूप में होगा। टैक्स में विशेष छूट मिलेगी। इससे नए उद्योग लगेंगे। नए निवेशक बिहार में पूंजी निवेश करेंगे। जिस प्रकार मुख्यमंत्री लगातार विशेष दर्जा पर जोर दे रहे हैं और आज कैबिनेट ने केंद्र के पास जिस तरह से प्रस्ताव भेज दिया है, उससे इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति गरमाएगी।

इससे पहले 2009 से 2011 तक इस मुद्दे पर जदयू ने बड़ा अभियान चलाया था। 2011 में बिहार के एक करोड़ लोगों का हस्ताक्षर करा कर राष्ट्रपति को सौंपा गया था।

नीतीश कैबिनेट : DA 4 % बढ़ा, जाति गणना पर लिया बड़ा निर्णय