भारतीय तालिबान : कामसूत्र जलाया, अगला निशाना अजंता-एलोरा?

भारतीय तालिबान : कामसूत्र जलाया, अगला निशाना अजंता-एलोरा?

गुजरात में बजरंग दल ने बुक स्टोर में घुसकर कामसूत्र पुस्तक को जला दिया। दुकान जलाने की धमकी दी है। सेशल मीडिया पर इसे भारतीय तालिबान क्यों कहा जा रहा?

पुस्तक जलाने से पहले बजरंद दल कार्यकर्ता

अहमदाबाद के एक बुक स्टोर में घुसकर बजरंद दल के कार्यकर्ताओं ने महर्षि वात्स्यायन रचित कामसूत्र पुस्तक की प्रति जला दी। कहा कि इसमें हिंदू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र हैं। उन्होंने पूरी दुकान को जलाने की धमकी दी है। कामसूत्र पुस्तक जलाने का वीडियो शोसल मीडिया पर वायरल है। लोग इसे भारतीय तालिबानी कार्रवाई की संज्ञा दे रहे हैं। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि इनका अगला निशाना क्या अजंता-एलोरा या कोणार्क की मूर्तियां होगा या खजुराहो का मंदिर। इसके साथ ही अनेक पुस्तकों में चरम प्रेम की कविता और कहानियां वर्णित हैं, क्या उन्हें भी ये जलाएंगे?

पत्रकार डीपी ने बजरंद दल द्वारा पुस्तक जलाने का वीडियो जारी करते हुए कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा- वात्स्यायन का कामसूत्र सदियों से भारत का गौरव रहा है, जैसे अजंता-एलोरा, खजुराहो और कोणार्क। तो अब हम क्या उम्मीद करें? जैसे अफगानिस्तान में बामियान बुद्ध की प्रतिमा बारूद से उड़ा दी गई, उसी तरह ये भारतीय विरासत भी उड़ा दिए जाएंगे?

उन्होंने आगे लिखा, तो क्या अब संस्कृत की सदियों पुरानी पुस्तकें जलाई जाएंगी। उन्होंने जयदेव के गीत गोविंद की पंक्तियां उद्धृत कीं-“रति-सुख-सारे गत अभिसारे, मदन मनोहर वेशम्।”
न कर नितम्बिनि! गमन विलम्बन, अनुसर निज हृदयेशम्॥
धीर समीरे यमुना-तीरे, राज रहे वनमाली।

गोपी-पीन-पयोमार-मर्दन-चञ्चलकर-युगशाली॥

पत्रकार डीपी ने वाल्मिकी रामायण में सीता के बारे में कही बातों को उद्धृत करते हुए पूछा कि क्या इन्हें भी जलाया जाएगा?

लेखिका सुजाता ने लिखा-भक्ति कविता लिखने वाली स्त्रियों का मन कृष्ण-काव्य में अधिक रमा तो बेवजह नहीं। आदर्श पितृसत्तात्मक आदर्श होते हैं जहां स्त्री के लिए कुछ नहीं, सीता की तरह आंसुओं के अलावा। कृष्ण काव्य में आनंद है। वहां राधा, गोपियों, मीरा, आंडाल को किसी कैरेक्टर सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं।

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हालांकि पुस्तक जलाने के पक्ष में भी कई लोग तर्क देते सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। मुख्यतः वे एक ही बात कह रहे हैं कि ओरिजनल कामसूत्र में चित्र नहीं थे, लेकिन वे इस सवाल पर चुप हैं कि जहां मंदिरों में प्रतिमाएं बनी हैं, उनका क्या?

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