BJP के ‘हिंदू चेहरे’ गिरिराज के क्षेत्र में कांग्रेस की जीत के मायने

BJP के ‘हिंदू चेहरे’ गिरिराज के क्षेत्र में कांग्रेस की जीत के मायने

BJP का बड़ा ‘हिंदू चेहरा’ माने जानेवाले गिरिराज सिंह के क्षेत्र में पार्टी को करारी हार मिली। यहां भूमिहारों ने क्यों BJP को खारिज और कांग्रेस को अपनाया?

कांग्रेस नेता अमरेंद्र सिंह

बिहार में भाजपा और संघ के हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले गिरिराज सिंह के क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की हार और कांग्रेस की जात के कई मायने हैं। यहां भाजपा के प्रत्याशी भी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि ताकतवर नेता थे। यहां से प्रत्याशी थे रजनीश कुमार। वह विधान परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक थे, जिन्हें कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा था। उनरी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी ‘ताकतवर’ रही है। इसके बावजूद यहां भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। एक बात और यहां से भाजपा लगातार दो बार से जीतती रही है। जिले में उसके दो विधायक हैं। बेगूसराय की शहर की सीट पर भी भाजपा का कब्जा है, इसके बाद भी हार से भाजपा को करारा झटका लगा है।

उधर कांग्रेस के लिए यह जीत बड़ी मानी जा रही है। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमरेंद्र सिंह ने नौकरशाही डॉट कॉम को बताया कि जिले की छह विधानसभा सीटों में दो पर सीपीआई, दो पर भाजपा, एक पर राजद और एक सीट पर जदयू का कब्जा है। कांग्रेस का जिले में एक भी विधायक नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी राजीव कुमार की शानदार जीत बताती है कि जिले के ‘समाज’ के लोग भाजपा की असलियत पहचान गए हैं। भाजपा को केवल हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करनी है। बेगूसराय ने भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति को खारिज कर दिया। कांग्रेस की जीत यह भी बताती है कि अब यहां का जो समाज सांसद गिरिराज के पीछे चल रहा था, उसका मोहभंग हो चुका है। वह कांग्रेस की तरफ लौट रहा है। वैसे भी बेगूसराय कांग्रेस का गढ़ था। कभी कृष्णा शाही जैसी चर्चित नेता यहां से जीता करती थीं। कांग्रेस समर्थित महेश्वर सिंह भी मोतिहारी से जीत गए हैं। कांग्रेस में दो सीटों पर जीत से खुशी का माहौल है। पार्टी अकेले चुनाव में उतरी थी।

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