बुलडोजर के विरुद्ध 20 हजार हिंदू-मुस्लिमों ने दिया मोहब्बत का पैगाम

बुलडोजर के विरुद्ध 20 हजार हिंदू-मुस्लिमों ने दिया मोहब्बत का पैगाम

जब कई राज्यों में मुस्लिमों पर बुलडोजर चल रहे, हिंसक नारे लग रहे, तो आज तेजस्वी के इफ्तार में 20 हजार हिंदू-मुस्लिमों ने दिया मोहब्बत का पैगाम।

जब चारों तरफ नफरत के नारे लग रहे हैं, तब आज बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के इफ्तार में बीसियों हजार हिंदू-मुस्लिमों ने एक साथ मिल कर मोहब्बत का पैगाम दिया। तेजस्वी यादव का यह इफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर आयोजित था। तिल रखने की जगह नहीं थी, पर कहीं कोई अव्यवस्था नहीं दिखी। लगातार आवाज गूंज रही थी-आइए हम देश में अमन और खुशहाली के लिए, बिहार की तरक्की के लिए, हिंदू-मुस्लिमों सहित सभी धर्मों में भाईचारे के लिए दुआ करें।

तेजस्वी यादव के इफ्तार में अगर चार पहिया वाहनों से आनेवालों की बडी संख्या थी, तो उससे भी ज्यादा संख्या में पैदल या बाइक से लोग पहुंचे थे। हिंदू भी, मुस्लिम भी। प्रवेश द्वार पर ही कई कार्यकर्ता सबको नमाज के वक्त पहनी जानेवाली टोपी दे रहे थे। आगे बढ़ने पर परिसर में जिधर देखिए, उधर टोपियां ही टोपियां दिख रही थीं। भाईचारे की मिसाल दिख रही थी कि अनेक लोगों के ललाट पर तिलक लगा था और माथे पर सफेद गोल टोपी। सचमुच यह इफ्तार हिंदू-मुस्लिम एकता का त्योहार बन गया।

इफ्तार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहुंचे। लोजपा (रामबिलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान भी आए। इन दोनों नेताओं के इफ्तार में पहुंचने पर कई लोग इसका राजनीतिक निहितार्थ खोजने की कोशिश कर रहे थे, तो कई का मानना था कि इसमें राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए। जो भी हो, हर वर्ग और हर दल के नेता आज आपसी भाईचारे के लिए जुटे थे, जिससे देश में नफरत के माहौल में बिहार ने बिल्कुल अलग संदेश दिया। भाईचारे और सद्भाव का संदेश। हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश। गंगा-जमनी संस्कृति का संदेश। विविधता में एकता का संदेश।

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