कांग्रेस से सीधी लड़ाई में शाह ने मानी हार, कहा SP-BSP की मदद करो

कांग्रेस से सीधी लड़ाई में शाह ने मानी हार, कहा SP-BSP की मदद करो। ग्वालियर में भाजपा कार्यकर्ताओं-नेताओं को अमित शाह ने बताया जीत का मंत्र।

मध्य प्रदेश में भाजपा की कमान संभाल रहे गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सपा और बसपा की मदद करो। रूठे फूफा को मनाने में समय मत खराब करो। शाह सोमवार को ग्वालियर में प्रमुख नेताओं-कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भाजपा नेताओं को सपा-बसपा की मदद करने का निर्देश दिया। इसका मतलब साफ है कि उन्हें मालूम हो गया है कि सीधी लड़ाई में भाजपा चुनाव हार जाएगी। कांग्रेस जीत जाएगी। अब भाजपा तभी जीत सकती है, जब कांग्रेस का अधिक से अधिक वोट सपा और बसपा काटे। इसीलिए उन्होंने कहा कि सपा-बसपा की मदद करो। रूठे फूफा को मनाने में समय मत गंवाओ, इसका अर्थ है कि वे मान रहे हैं कि भाजपा के कई लोग रूठ गए हैं और वे चुनाव प्रचार में नहीं उतर रहे हैं।

अमित शाह के इस बयान पर कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सूरजेवाला ने कहा कि भाजपा के चुनावी रणनीतिकार ने चुनावी हवा को पहचान लिया है और देख लिया है कि भाजपा हार रही है। अब उन्हें कांग्रेस के वोट कटवाने की फिक्र है। सूरजेवाला ने आ रही कांग्रेस कहते हुए लिखा-भाजपा के सबसे बड़े ‘स्वघोषित रणनीतिकार’ तो चुनाव से पहले ही हार मान चुके हैं ! साढ़े 18 साल से भाजपा के कुशासन, भ्रष्टाचार और अत्याचार के खिलाफ, मध्य प्रदेश के उफनते “आक्रोश” को भांपते हुए.. भाजपा के “दो नंबरी” रह जाने की भी उम्मीद छोड़कर, भाजपाईयों को सपा-बसपा की मदद करने की सलाह दे रहें हैं ! अब तो वो सुनिश्चित हार से पहले, भाजपा में मचे भयंकर अंतर-विरोध और विद्रोह के बहाने ही.. “झूठ के गुब्बारे” फुलाने वाले ‘स्वघोषित मामा’ को भी, “रूठे फूफा” बताकर मानने- मनाने से मना कर रहे हैं ! इस बीच मध्य प्रदेश की जनता, भाजपा के कुकर्मों का हिसाब करने के लिए 17 नवंबर का इंतजार कर रही है !

दरअसल भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को चुनाव में उतारा है। जो केंद्रीय मंत्री विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं वे हैं-नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते। इनके अलावा भाजपा ने जबलपुर से वर्तमान सांसद राकेश सिंह को जबलपुर-पश्चिम विधानसभा सीट से और होशंगाबाद से वर्तमान सांसद उदय प्रताप सिंह को गाडरवारा विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। इन सांसदों को मैदान में उतारने से वे नाता नाराज हैं, जो वर्षों से विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे। इसी तरह जिनके टिकट कटे हैं, वे भी नाराज हैं और प्रचार में सक्रिय नहीं है। इन्हें ही अमिक शाह ने रूठे हुए फूफा कहा और यह भी निर्देश दिया कि इन्हें मनाने का काम न करें। सपा-बसपा को मदद करें।

अमित शाह और सूरजेवाला के बयान के बाद सपा-बसपा की स्थिति और भी खराब हो सकती है। अगर यह मैसेज चला गया कि ये भाजपा की ताकत पर लड़ रहे हैं, तो न सिर्फ सपा-बसपा के लिए परेशानी होगी, बल्कि भाजपा की जीत पर भी ग्रहण लग जाएगा।

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By Editor


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