दिनकर ओज के, किंतु मानवतावादी राष्ट्रकवि थे : डॉ अनिल सुलभ

दिनकर ओज के, किंतु मानवतावादी राष्ट्रकवि थे : अनिल सुलभ

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के जयंती समारोह में कहा कि दिनकर ओज के, किंतु मानवतावादी कवि थे।

‘जला अस्थियाँ बारी-बारी, चिटकाई जिनने चिनगारी/ जो चढ़ गए पुण्य-वेदी पर, लिए विना गर्दन का मोल / कलम आज उनकी जय बोल” ! राष्ट्र्कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इन पंक्तियों के साथ, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिलसुलभ ने,सम्मेलन सभागार में आयोजित जयंती समारोह में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि ‘दिनकर’ ओज के, किंतु मानवतावादी राष्ट्र-कवि थे। ‘शब्द’ की क्या शक्ति होती है, और वह किस प्रकार मर्म का भेदन करता है, यह राष्ट्रकवि के काव्य में अनुभूत किया जा सकता है। वे सही अर्थों में अपने समय के ‘सूर्य’ थे। वे नेहरु जी के अत्यंत निकट थे। राज्यसभा के सदस्य भी रहे और उन्हें भारत सरकार ने ‘पद्म-भूषण’अलंकरण से भी विभूषित किया।

समारोह के मुख्यअतिथि और बिहार-गीत के रचनाकार कवि सत्य नारायण ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर हिन्दी के अर्द्ध-नारीश्वर कवि हैं। हिन्दी कविताओं में बिहार के प्रतिनिधि हैं दिनकर । वे कालजयी कवि हैं। दिनकर का रचना-संसार अत्यंत व्यापक है, जिसमें यह धारा ही नहीं, ब्रह्माण्ड समाहित है। साहित्य सम्मेलन में उनके ठहाके गूंजते थे।

समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ऐक्सिस बैंक के उपाध्यक्ष और कवि लाल सिंह ने कहा कि दिनकर की कविताएँ हृदय को स्पर्श करती है। उनके शब्द ज़मीन से जुड़े हुए हैं। इसीलिए दिनकर एक महान कवि हैं। सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, डा मधु वर्मा, राष्ट्रकवि के पौत्र और साहित्यकार अरविंद कुमार सिंह, प्रो इंद्रकांत झा, बच्चा ठाकुर तथा आनंद किशोर मिश्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर आयोजित कवि-गोष्ठी का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवि और सम्मेलन के उपाध्यक्ष मृत्युंजय मिश्र’करुणेश’ ने कहा – “सुख-दुःख आते जाते रहते, जीवन रथ का पहिया है/ जीत गए तो होश न खोना, शोक न करना हारो तो/ चिंताओं से छुटकारा हो, इच्छाओं को मारो तो/ जितनी लम्बी चादर हो, बस उतने पाँव पसारो तो।”

वरिष्ठ कवि बच्चा ठाकुर, डा मेहता नगेंद्र सिंह, ओम् प्रकाश पाण्डेय ‘प्रकाश’, डा पुष्पा गुप्ता, ब्रह्मानन्द पाण्डेय, कुमार अनुपम, डा प्रतिभा रानी, पूनम आनंद, डा मीना कुमारी परिहार, नूतन सिन्हा, डा विनय विष्णुपुरी, तलअत परवीन, डा शालिनी पाण्डेय, मोईन गिरिडिहवी, जबीं शम्स, कमल किशोर ‘कमल’, दिनेश्वर लाल दिव्यांशु, ई अशोक कुमार, मो शादाब, सदानंद प्रसाद, श्रीकांत व्यास, शशिकान्त कुमार, नरेंद्र कुमार, अजित कुमार भारती, आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया। मंच का संचालन सुनील कुमार दूबे ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

इस अवसर पर, वरिष्ठ कथा-लेखिका ममता मेहरोत्रा, व्यंग्य-लेखक बाँके बिहारी साव, निर्मला सिन्हा, ज्ञानेश्वर शर्मा, नेहाल कुमार सिंह ‘निर्मल’, रामाशीष ठाकुर, कुमार कश्यप, डा अभय कुमार दीपक, रघुनाथ प्रसाद, प्रेमनाथ उपाध्याय, राम प्रसाद ठाकुर समेत बड़ी संख्या में सुधीजन उपस्थित थे।

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