गोदी मीडिया क्यों कह रहा JDU अध्यक्ष ललन सिंह हटाए जाएंगे?

गोदी मीडिया क्यों कह रहा JDU अध्यक्ष ललन सिंह हटाए जाएंगे?

गोदी मीडिया क्यों कह रहा JDU अध्यक्ष ललन सिंह हटाए जाएंगे? पहले भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा फिर गोदी मीडिया ने बना दिया एजेंडा। क्या है सच्चाई?

इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद गोदी मीडिया ने खबर उड़ाई कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा लालू प्रसाद पिछले नाराज हैं। जब इसका खंडन हो गया, तब उसने एक दूसरी खबर उड़ाई कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को पद से हटाया जाएगा। दरअसल भाजपा सांसद सुशील मोदी ने पहले मीडिया को खबर दी की ललन सिंह को पद से हटाया जाएगा। लालू प्रसाद से नजदीकी केकारण उन्हें हटाया जाएगा। उसके बाद गोदी मीडिया ने इसे एजेंडा बना दिया।

नौकरशाही डॉट कॉम ने जदयू के कई नेताओं से संपर्क किया, तो मालूम हुआ कि इस खबर में कोई दम नहीं है। कोई आधार नहीं है। वर्तमान मोदी सरकार जिस तरह ईडी-सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है, संसद में जिस तरह सवाल पूछने पर 146 सांसदों को बाहर कर दिया गया और जैसे-जैसे कानून बन रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में विपक्ष की राजनीति बहुत मुश्किल होने वाली है। आज ही राजद सांसद मनोज झा ने इंडिया गठबंधन की रैली में दिल्ली में कहा कि इस निजाम को समझिए, आने वाले खतरे को समझिए। देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा और विपक्ष जेल में होगा। इस स्थिति में जदयू क्यों अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को बदलेगा।

एक और बात ध्यान देने की है कि अब लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने रह गए हैं, ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष को बदल कर क्यों जदयू रिस्क लेना चाहेगा। ललन सिंह की छवि नीतीश कुमार के सबसे निकटतम नेताओं में है साथ ही वे मोदी सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। विरोधी भी मानते हैं कि सीबीआई या ईडी से ललन सिंह डरने वाले नहीं हैं, ऐसी स्थिति में उन्हें पद से हटाने का कोई तर्क बचता नहीं है।

दरअसल गोदी मीडिया लगातार राजद-जदयू की सरकार के खिलाफ कोई न कोई एजेंडा चलाता रहता है। कुछ महीने पहले तक कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार फिर से एनडीए में चले जाएंगे। अब वह राग धीमा पड़ा है, तो नया राग उसने छेड़ दिया है। भाजपा भी कभी नीतीश कुमार को हटाने की मांग करती है कभी कहती है कि लालू प्रसाद नीतीश पर दबाव बना रहे हैं। कभी वह नीतीश के खिलाफ हो जाती है, कभी सहानुभूति जताने लगती है।

हां एक स्थिति यह हो सकती है कि खुद ललन सिंह की सहमति से नीतीश कुमार कोऊ फैसला लें। किसी अतिपिछड़े को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाएं। इससे मैसेज अच्छा जाएगा। लेकिन इस मामले में भी कई सवाल हैं। केंद्र सरकार जिस तरह विपक्ष के साथ व्यवहार कर रही है, उसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष अगर मजबूत नहीं हुआ, तो कभी भी वह दबाव में आ सकता है। इसीलिए कुल मिला कर ललन सिंह को हटाने का कोई ठोस तर्क नहीं दिखता, बल्कि यह गोदी मीडिया का एजेंडा ही ज्यादा लगता है।

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