जहां सर्वाधिक नौकरी बिहारियों को मिलती, वहां कुंडली मार बैठे मोदी

जहां सर्वाधिक नौकरी बिहारियों को मिलती, वहां कुंडली मार बैठे मोदी

बिहार के औसत युवा सबसे ज्यादा किसकी तैयारी करते हैं, किसमें जाते रहे? डिफेंस में? नहीं। तो किसमें? राजद ने क्यों प्रधानमंत्री मोदी को कहा बिहार विरोधी?

ऐसे तो बिहार के युवा देशभर में हर सेक्टर में जाते रहे हैं, लेकिन औसत युवा सबसे ज्यादा किस केंद्रीय सेवा में जाते हैं? डिफेंस में? राजस्व सेवा में? नहीं, नहीं। डिफेंस में भी बिहारी युवा जाते हैं, पर पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी के सबसे ज्यादा युवा जाते हैं। बिहार के सबसे ज्यादा युवा Railway की तैयारी करते हैं। और ठीक इसी सेक्टर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाए बैठे हैं। राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिहार विरोधी कहा और बताया कि प्रधानमंत्री रेलवे की तीन लाख नौकरियों पर वर्षों से कुंडली मार कर बैठे हैं।

राजद प्रवक्ता गगन ने पूछा कि प्रतिवर्ष दो करोड़ नौजवानों को रोजगार देने, पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान 19 लाख नौजवानों को नौकरी देने के साथ ही पिछले दिनों प्रधानमंत्री द्वारा 18 महीने में 10 लाख नौजवानों को नौकरी देने के वादे का क्या हुआ। कहा कि जब से केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है केन्द्रीय सेवाओं में रिक्तियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज केन्द्र की भाजपा सरकार एक करोड़ से ज्यादा रिक्तियां चुरा कर बैठी हुई है। पिछले आठ सालों में मात्र 7. 22 लाख नौकरी दी गई। जबकि 22.05 करोड़ लोगों ने नौकरी के लिए आवेदन किया था। जबकि इस आठ साल में सार्वजनिक उपक्रमों सहित केन्द्र सरकार के मातहत विभागों में 90 लाख से ज्यादा पद रिक्त हुए हैं।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि जबसे केन्द्र में भाजपा की‌ सरकार बनी है नौकरी देने की संख्या में क्रमिक रूप से कमी आती गई। 2017-18 में घटकर 76147 और 2018-19 में मात्र 38100 लोगों को नौकरी दी गई। चुंकि 2019 में लोकसभा का चुनाव था इसलिए वर्ष 2019-20 में 1लाख 47,096 लोगों को नौकरी दी गई थी। गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में फिर नौकरी पाने वालों ‌की संख्या घटकर 38,850 हो गई।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि आज की तारीख में रेलवे में 3 लाख , डिफेंस में 2.75 लाख , गृह विभाग में 1.40 लाख , डाक विभाग में 90,000 , राजस्व विभाग में 80,000 के साथ हीं अखिल भारतीय स्तर पर 2019-20 में 60 लाख से ज्यादा पद रिक्त थे जिसे आज की तारीख में एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है। सार्वजनिक उपक्रमों को जोड़ देने पर रिक्तियों की संख्या लगभग दो करोड़ से ज्यादा हो जाएगी।

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