जमाअत-ए-इस्लामी ने किया यूनिवर्सिटी खोलने का एलान

जमाअत-ए-इस्लामी ने किया यूनिवर्सिटी खोलने का एलान। चार वर्षीय योजना में सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा व युवाओं की आर्थिक प्रगति पर मिशन मोड में होगा काम।

जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द बिहार अगले चार वर्षों में इस्लाम और इस्लामी शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए योजनाबद्ध रूप से प्रयास करेगी। इसके अलावा, पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर पर साम्प्रदायिक सौहार्द्र, शिक्षा, महिलाओं एवं बच्चों का विकास और युवाओं की आर्थिक उन्नति की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर का विवि खोलने का भी एलान किया गया। जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द बिहार के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना रिजवान अहमद इस्लाही ने शनिवार को पटना में आयोजित ‘मीडिया मीट’ के दौरान ये बातें कहीं।

मौलान रिजवान ने कहा कि जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द बिहार ने वर्ष 2023-27 के लिए सावधिक योजना तैयार की है जिसपर मिशन मोड में काम किया जाएगा। योजना में सोच में परिवर्तन पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। इस्लाम के प्रति नकारात्मक सोच में परिवर्तन लाने में पत्रकार बंधुओं की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के बारे में एक वर्ग में कई तरह की गलतफहमियां पाई जाती हैं। इन गलतफहमियों और नफरत को दूर करने के लिए ‘धार्मिक जन मोर्चा’ की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। धार्मिक जन मोर्चा में सारे धर्मों के धर्मगुरु शामिल हैं।

जमाअत के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि बिना किसी भेदभाव के तमाम नागरिकों की सेवा की जाएगी। जमाअत के कैडर में बढ़ोतरी पर विशष रूप से ध्यान दिया जाएगा। शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना शैक्षिक स्तर को ऊपर उठाकर अल्पसंख्यकों के शैक्षिक विकास पर ध्यान दिया जाएगा। बच्चों का नैतिक और बौद्धिक रूप से पोषण किया जाएगा।

मीडिया मीट में डा. सैयद शहबाज आलम, राशिद अहमद, इर्शादुल हक, सेराज अनवर, जावेद अख्तर, अनवारुल होदा, इमरान सगीर, खालिद रशीद, खुर्शीद आलम, शाबान अतीकुर्रहमान, इम्तियाज करीम, नवाब अतीकुज्जमां, जियाउल हसन और नेमतुल्लाह समेत कई वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे।

इस अवसर पर पत्रकारों ने जमाअत के प्रयासों की सराहना करते हुए योजनाअें के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कई अहम सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि मसलकी भेदभाव को दूर करने के लिए विशेष रूप से योजना बनाई जानी चाहिए। आठ से दस साल के बच्चों की प्रतिभा में निखार लाने के लिए टैलेंट हंट जैसा कार्यक्रम शुरू होना चाहिए। आईटी सेल ओर मीडिया सेल को मजबूब बनाया जाए। पीड़ितों को उपलब्ध कराई जाने वाली कानूनी सहायता की रिपोर्ट जारी होनी चाहिए। लीगल सेल की स्थापना और उसको सक्रिय बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए।

जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द की योजनाओं में कुछ खास-खास काम इस तरह हैं-

जमाअत-ए-इस्लामी का प्रयास होगा कि देश और समाज में शांति एवं न्याय की स्थापना हो, दंगा-फसाद, ऊंच-नीच तथा भेदभाव दूर हो। विभिन्न सम्प्रदायों के मिले-जुले कार्यक्रम किए जाएं जिनके शीर्षक इस प्रकार हो सकते हैं।अंतर धार्मिक संवाद के कार्यक्रम रखे जाएंगे। समाज सुधार से संबंधित देशव्यापी मुहिम बिहार में भी चलाई जाएगी। जमाअत की तमाम इकाइयों में ग़रीब व ज़रूरतमंद व्यक्तियों और तलाक़शुदा व बेसहारा महिलाओं की मदद की जाएगी और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया जाएगा। ब्याज रहित बैंकिंग और इस्लामी अर्थव्यवस्था के विषय पर बड़ी जमाअतों में लेक्चर और सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। प्रदेश स्तर पर ‘सर्वधर्म मंच’ और स्थानीय स्तर पर सद्भावना मंच की स्थापना और स्थायित्व पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। महिला विभाग द्वारा पटना, मुज़फ़्फ़रपरु, दरभंगा, मोतिहारी, अररिया, गया, सहरसा, फ़ारबिसगंज और सुपौल में सद्भावना मंच की स्थापना की जाएगी।

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By Editor