झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लोकसभा चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि तीनों प्रदेशों में भाजपा का बचना मुश्किल है। झारखंड में पांच सीटें राजमहल, दुमका, खूंटी, प. सिंहभूम तथा लोहरदगा अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित हैं। इन पांचों सीटों पर भाजपा चुनाव हार गई है। पूरे प्रदेश के आदिवासी हेमंत सोरेन को जेल में बंद किए जाने से नाराज हैं और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन आदिवासी समाज की नई नेता बन कर उभरी हैं। झामुमो और इंडिया गठबंधन में उत्साह दिख रहा है और भाजपा पूरी तरह रक्षात्मक बनी हुई है।

इसी तरह महाराष्ट्र में भाजपा अभी ही गहरे संकट में दिख रही है। भाजपा के कई दिग्गज चुनाव हार चुके हैं। भाजपा ने शिवसेना तथा एनसीपी को तोड़ कर समझा था कि महाराष्ट्र की राजनीति पर उसका कब्जा हो जाएगा, लेकिन लोकसभा चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन में जोश है और भाजपा में कलह शुरू हो गया है।

देवेंद्र फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की पेशकेश की है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस ने महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 13 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बनी है। उसे नौ सीटों पर संतोष करना पड़ा। उद्धव ठाकरे की पार्टी को भी नौ सीटों पर जीत हासिल हुई। शरद पवार के खाते में आठ सीटें आईं। वहीं सीएम एकनाथ शिंदे की पार्टी को सात सीटें मिली हैं। अजित पवार को एक सीट से संतोष करना पड़ा। एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली। इस परिणाम का असर यह है कि शिंदे और पवार के नेता अभी से मूल पार्टी में आने को बेताब दिख रहे हैं।

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उधर हरियाणा में भाजपा पांच सीटों पर सिमट गई। 2019 में उसने सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की थी। यहां किसानों में भाजपा के खिलाफ भारी नाराजगी दिख रही है। लोकसभा चुनाव परिणाम नेबता दिया है कि भाजपा अब अवसान की तरफ है। उसके दिन लद रहे हैं।

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By Editor


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