कुमार अनिल
राहुल गांधी के संविधान बचाओ अभियान और तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता से एनडीए का दलित आधार तेजी से टूट रहा है। केंद्रीय मंत्री और हम के संयोजक जीतनराम मांझी के भाषण से भी इसे समझा जा सकता है। वे पार्टी द्वारा गांधी मैदान में आयोजित दलित समागम को संबोधित कर रहे थे।
जीतनराम मांझी ने अपने भाषण में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि किसी भी हालत में बंटना नहीं है। हमें एक होकर वोट देना है। अगर हम बंटेंगे, तो नुकसान हो जाएगा। कहा कि जो आगे बढ़ गया है, उसे मदद करने की जरूरत है। वह आगे रहेगा, तभी कुछ कर पाएगा। जाहिर है कि वे अपने लिए समर्थन मांग रहे थे।
जीतनराम मांझी के बार-बार नहीं टूटने की अपील का अर्थ है कि उन्हें टूटने की आशंका है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा ने भी मांझी को अवश्य फीडबैक दिया होगा, जिसमें राहुल गांधी के संविधान बचाओ अभियान की दलितों में सर्वाधिक चर्चा और समर्थन तथा तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता की बात होगी।
याद रहे पिछले महीने राहुल गांधी स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी जयंती के अवसर पर पटना आए थे। उस कार्यक्रम में पासी समुदाय का स्पष्ट समर्थन दिखा था। उनके संविधान बचाओ अभियान के साथ ही धीरे-धीरे आरक्षण को खत्म किए जाने, दलित वर्ग के छात्रों की स्कालरशिप की राशि में कटौती किए जाने से दलितों में भाजपा से नाराजगी है। इस नाराजगी को कम किए बिना राज्य में एनडीए सत्ता में नहीं आ सकता। इसीलिए मांझी दलितों के मूल सवालों के उठाने के बजाय बंटटना नहीं है पर जोर देते रहे।