कर्नाटक : आ गई कांग्रेस, दिया ऐसा नारा, 2024 तक BJP रहेगी परेशान

कर्नाटक : आ गई कांग्रेस, दिया ऐसा नारा, 2024 तक BJP रहेगी परेशान

कर्नाटक में सिद्दारमैया और डीके के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने शपथ ली। पहले ही दिन राहुल ने दिया ऐसा नारा, 2024 तक BJP रहेगी परेशान। अपनी दिशा भी बता दी।

कुमार अनिल

कर्नाटक में सिद्दारमैया और डीके शिव कुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने शनिवार को शपथ ली। शपथ के साथ ही राहुल गांधी ने दिया ऐसा नारा दिया, ऐसी बात कही, जिसे वे 2024 तक दुहराएंगे और भाजपा को परेशान करते रहेंगे। ये ऐसा नारा है, जिसका ठीक-ठीक जवाब भाजपा कभी नहीं दे पाएगी। इसके साथ ही राहुल गांधी ने कांग्रेस की दिशा भी स्पष्ट कर दी, जिस रास्ते कांग्रेस भाजपा का मुकाबला करेगी।

राहुल गांधी ने बेंगलुरू में कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर सभी को संबोधित करते हुए दो खास बातें कहीं। पहली यह कि वे झूठे वादे नहीं करते। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार अपनी पहली बैठक में जनता को दी पांच गारंटी पूरी करेगी। आप गौर करिए, राहुल ने कहा कि कांग्रेस झूठे वागे नहीं करती। तो कौन झूठे वादे करता है? जाहिर है इशारा भाजपा की तरफ है। केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों, बेरोजगारों और देश की जनता से जो वादे किए, उसे उसने पूरा नहीं किया। भाजपा की राज्य सरकारों ने भी वादा तोड़ दिया। हम झूठे वादे नहीं करते कह कर दरअसल कांग्रेस ने भाजपा को कटघरे में खड़ा किया है और वे 2024 तक ऐसा बार-बार करेंगे। कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के बाद अब कर्नाटक सरकार के वादे पूरे करने को हथियार बना कर भाजपा पर हमला करेगी।

राहुल गांधी ने एक दूसरी खास बात कही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के कई कारण बताए जा रहे हैं। विश्लेषण छप रहे हैं। लेकिन मेरा (राहुल का) कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस इसलिए जीती क्योंकि वह गरीब, दलित, आदिवासी और पिछड़ों के पक्ष में खड़ी हुई। इसी के साथ राहुल गांधी ने कांग्रेस की दिशा भी तय कर दी। राज्य की कांग्रेसी सरकारें इन्हीं तबकों के उत्थान पर जोर देगी। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसी साल चुनाव होंगे। इन राज्यों में कांग्रेस की तैयारी इन्हीं वर्गों पर केंद्रित होगी तथा भविष्य के वादे के केंद्र में भी यही तबके होंगे।

कभी कांग्रेस का आधार ब्राह्मण, दलित और मुसलमान हुआ करते थे, अब नई कांग्रेस के आधार होंगे गरीब, दलित, आदिवासी और पिछड़े। इन्हीं में मुस्लिम भी शामिल हैं।

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