किसानों के पक्ष में कांग्रेस समर्थकों ने क्यों किए 1.1 लाख ट्वीट

किसानों के पक्ष में कांग्रेस समर्थकों ने क्यों किए 1.1 लाख ट्वीट

आज कांग्रेस ने किसान आंदोलन के पक्ष में सेशल मीडिया पर #KisanMareSarkarSoye (किसान मरे, सरकार सोए) अभियान चलाया। इसके राजनीतिक मायने क्या हैं?

आज कांग्रेस ने किसान आंदोलन के पक्ष में सोशल मीडिया पर किसान मरे, सरकार सोए अभियान चलाया। केवल ट्विटर पर पांच घंटे में एक लाख दस हजार ट्विट हो चुके हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले भी तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते रहे हैं। लेकिन आज कांग्रेस ने जो अभियान चलाया, वह समय के लिहाज से बेहद खास है, इसीलिए इस अभियान का महत्व बढ़ गया है।

दो दिन पहले देशभर में किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया और राज्यपाल के मार्फत राष्ट्रपति को रोषपत्र भेजा। रोषपत्र किसान आंदोलन का टर्निंग प्वाइंट है। रोषपत्र में पहली बार किसानों ने तीन कृषि कानूनों को रद्द करने तक आंदोलन को सीमित नहीं रखा, बल्कि मजदूर, छात्र-युवा, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यकों के आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई। यहां तक कहा कि आंदोलनों को दबाने के लिए सरकार यूएपीए जैसे काले कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। रोषपत्र में कहा गया कि सरकार विरोध की आवाज को दबा रही है।

किसानों का आंदोलन 26 जनू लोकतंत्र बचाओ आंदोलन में विकसित होने की तारीख के रूप में याद किया जाएगा। किसानों ने कहा भी कि उनका आंदोलन अब खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ है।

इसके ठीक दो दिन बाद आज कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हल्ला बोल दिया। किसान मरे, सरकार सोए अभियान के जरिए कांग्रेस ने किसान आंदोलन के साथ आज जो एकजुटता दिखाई, उसके गहरे राजनीति अर्थ हैं।

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आजादी के बाद कांग्रेस ने देश में शुरू हुए तमाम तरह के आंदोलनों को खुद में जगह दी। भूमि सुधार से लेकर आंबेडकर के सामाजिक न्याय के आंदोलन तक साथ आए। इसका फायदा भी कांग्रेस को मिला। हाल के दशकों में कांग्रेस वह कौशल, लचीलापन और राजनीतिक हिस्सेदारी का मंच नहीं बन पाई। अब जिस तरह कांग्रेस ने किसान आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई है, वह नए राजनीतिक गठजोड़ को जन्म देगा। यह 2024 के लोकसभा चुनाव पर असर डालेगा। किसान कह भी रहे हैं कि उनका आंदोलन तीन साल चलेगा और जो दवाई बंगाल में दी, वही दवाई देंगे।

जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की राज्य कमेटी घोषित, 111 सदस्य

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