कोलकाता में सड़क पर उतरीं ममता, निकाली सर्वधर्म रैली

कोलकाता में सड़क पर उतरीं ममता, निकाली सर्वधर्म रैली

कोलकाता में सड़क पर उतरीं ममता, निकाली सर्वधर्म रैली। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के धर्मगुरु भी सड़क पर पैदल चले। सद्भाव, प्रेम का दिया संदेश।

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सभी धर्मों के धर्म गुरुओं के नेतृत्व में सोमवार को हजारों लोगों ने सर्वधर्म सद्भाव और एकता रैली निकाली। सर्वधर्म सद्भाव रैली कोलकाता को हाजरा चौराहे से निकाली, जिसे बांग्ला में ‘संगति मार्च’ कहा जा रहा है। सद्भाव रैली से पहले ममता बनर्जी ने कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की। रैली में वे सबसे आगे हाथ जोड़ कर चलती दिख रही थीं। आज ही टीएमसी ने पूरे बंगाल के हर प्रखंड में सर्वधर्म एकता रैली निकाली। हर प्रखंड में सभी धर्मों के लोग शामिल थे।

टीएमसी ने कहा कि सर्वधर्म एकता रैली का 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन से कोई संबंध नहीं है। बंगाल में भाजपा ने राममंदिर को मुद्दा बनाने की कोशिश की है। भले ही ममता बनर्जी ने सद्भाव रैली को राममंदिर से नहीं जोड़ा, लेकिन स्पष्ट है कि एक तरफ धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है और दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने सर्वधर्म रैली करके संदेश दिया वे एक धर्म की धार्मिक भावनाओं को उभारने के खिलाफ हैं।

बंगाल वैसे भी सांप्रदायिक राजनीति का गढ़ नहीं रही है। यहां आजादी के बाद कांग्रेस सत्ता में रही। इसके बाद लंबे समय तक वामपंथी सरकार रही। फिर ममता बनर्जी का शासन है। भाजपा का यह पुराना गढ़ नहीं रहा। 2019 में पहली बार भाजपा के पक्ष में उभार दिखा, लेकिन उसकी एक सीमा है। बंगाल की जनता हिंदू-मुस्लिम क नाम पर राजनीति को सीमा से ज्यादा पसंद नहीं करती। पिछली बार भाजपा ने बहुत कोशिश की। खुद प्रधानमंत्री ने अभियान का नेतृत्व किया, लेकिन परिणाम ममता की सीटें बढ़ गईं। बंगाल का समाज हिंदू-मुस्लिम साथ-साथ रहने का है।

ममता बनर्जी ने सर्वधर्म एकता रैली करके बंगाल में सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ एक विकल्प दे दिया है। मिल-जुल कर रहने का संदेश दिया है। शांति और सद्भाव का संदेश दिया है। ममता बनर्जी को भले ही भाजपा अधर्मी कहे, लेकिन बंगाल की जनता शायद ही ममता बनर्जी को अधर्मी माने।

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