मणिपुर और INDIA पर विपक्ष के चंगुल में फंस गए प्रधानमंत्री

मणिपुर और INDIA पर विपक्ष के चंगुल में फंस गए प्रधानमंत्री

मणिपुर और INDIA पर विपक्ष के चंगुल में फंस गए प्रधानमंत्री। भाजपा नेता भी नहीं कर पा रहे बचाव। खड़गे बोले मणिपुर जल रहा, वे ईस्ट इंडिया की बात कर रहे।

कुमार अनिल

पहली बार ऐसा दिख रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात को भाजपा के बड़े नेता दुहराने से बच रहे हैं। वे पीएम की बात को विस्तार देने में भी रुचि नहीं ले रहे। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को विपक्षी गठबंधन इंडिया की तुलना आतंकी संगठन से कर दी। होना तो यही चाहिए था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो तुलना की, उसे भाजपा के सारे नेता दुहराते, लेकिन गजब हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की बात को भाजपा के नेता दुहराने से बच रहे हैं। भाजपा सांसद सुशील मोदी प्रधानमंत्री की हर बात को तुरत रिट्वीट करते हैं, उसमें कुछ अपनी बात भी जोड़ कर प्रधानमंत्री को सही ठहराते हैं, लेकिन पहली बार वे पीएम के इंडिया पर दिए बयान पर खामोश दिख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर पर संसद में बोलने से भाग रहे हैं। वे विपक्षी गठबंधन के इंडिया नाम से भी खासे परेशान थे, तभी उन्होंने इसकी तुलना आतंकी संगठन से कर दी। उन्होंने शायद सोचा होगा कि विपक्ष पर यह करारा हमला साबित होगा, लेकिन हुआ उल्टा। वे खुद फंस गए। वे विपक्ष को अपने बयान में उलझाने के बजाय विपक्ष को एकजुट कर गए। पहले से एकजुट हो रहे विपक्ष को और भी मजबूती दे दी।

विपक्षी गठबंधन की तुलना आतंकी संगठन से करना उन्हें महंगा पड़ गया। आगे भी महंगा पड़ेगा। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार विपक्षी गठबंधन को आतंकी संगठन बताया, उससे यही साबित होता है कि तानाशाही की राह पर बढ़ चले हैं। विपक्ष के प्रति ऐसी सोच घोर अलोकतांत्रितक है। लोकतंत्र में विपक्ष का सम्मान करने के बजाय प्रधानमंत्री ईस्ट इंडिया कंपनी की बात कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश मणिपुर पर चर्चा करना चाह रहा है, प्रधानमंत्री का बयान संसद में सुनना चाहता है और प्रधानमंत्री मंत्री मणिपुर के बदले ईस्ट इंडिया कंपनी की बात कर रहे हैं। इस बीच विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद तो मणिपुर पर संसद में चर्चा होनी तय है। संसद के मॉनसून सत्र के बाद अगर विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल मणिपुर पहुंच गया, तब क्या करेंगे प्रधानमंत्री। देखना है वे मणिपुर पर कार्रवाई करने से कितने दिन बचते हैं। वे जितना देर कर रहे हैं, उन्हें उतना ही नुकसान हो रहा है।

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