देशभर में दलित भाजपा से नाराज हैं। उन्हें बाबासाहब आंबेडकर के संविधान की चिंता है, जिसे भाजपा वाले कहते हैं कि बदल देंगे। अब खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिहार के दो दलित नेता बनारस पहुंचे हैं। ये हैं हम पार्टी के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी तथा लोजपा के एक खेमे के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस। दोनों दलित नेता सोमवार को विशेष विमान से बनारस पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो में शामिल हुए।

इस खबर ने कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया है। प्रधानमंत्री मोदी देशभर में अपने प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं और उनके रोड शो में दूसरे प्रदेश के दलित नेताओं के जाने की जरूर खास वजह है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देशभर के दलित भाजपा के चार सौ पार नारे से चिंतित हैं। भाजपा के कई प्रत्याशी कह चुके हैं कि भाजपा संविधान को बदल देगी। उत्तर प्रदेश में भी दलितों में भाजपा से दूरी दिखाई पड़ रही है। माना जा रहा है कि मांझी और पारस को इसीलिए विशेष विमान से बनारस बुलाया गया।

हालांकि खुद मांझी का चुनाव फंसा हुआ है। गया में दलितों का अच्छा हिस्सा राजद प्रत्याशी के साथ गया है। यहां तक कि पासवान समाज में भी संविधान को लेकर चिंता है और उन्होंने कई सीटों पर इंडिया गठबंधन को भी वोट दिया है, जबकि एक महीना पहले तक पूरे पासवान समाज को चिराग पासवान के पीछे माना जा रहा था।

उप्र में बसपा प्रमुख मायावती के हाल के कदमों ने भी दलितों को उनसे दूर किया है। उन्होंने आकाश को अपना उत्तराधिकारी और नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया था। आकाश ने संविधान की रक्षा को बड़ा मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर तीखे हमले किए थे, उसके बाद मायावती ने उन्हें जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। इसका संदेश यही गया कि मायावती पूरी तरह भाजपा के लिए काम कर रही हैं। इस संदेश के बाद बसपा और भी कमजोर हुई तथा आम तैर से दलितों को झुकाव सपा-कांग्रेस के गठबंधन की तरफ बढ़ा। पहले गैर जाटव मतदाताओं में भाजपा की अच्छी पकड़ थी, लेकिन हाल के दिनों में संविधान की रक्षा को लेकर दलितों की भाजपा से दूरी बढ़ी है। माना जा रहा है कि दलित आधार में बिखराव को रोकने के लिए भाजपा के रणनीतिकारों ने मांझी और पारस को बनारस में कैंप करने के लिए बुलाया।

बिहार में शाम पांच बजे तक 54 प्रतिशत और यूपी में 56 प्रतिशथ मतदान

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