मोदी का गले मिलना भारी पड़ा, ब्रिटिश अखबार ने रगड़ दिया

मोदी का गले मिलना भारी पड़ा, ब्रिटिश अखबार ने रगड़ दिया

पीएम मोदी ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छाए हैं। अखबार की हेडिंग है-अटपटे क्षण, प्रधानमंत्री मोदी यूएन नेता से सट कर गले मिले। अखबार ने मोदी के कई फोटो छापे।

कुमार अनिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से विदेशी अखबार में छाए हुए हैं। वे जलवायु परिवर्तन पर ग्लास्गो में विश्व नेताओं के साथ हैं। यहां वे हर नेता से गले मिले। गले मिलते समय उन्होंने मास्क भी नहीं लगाया था। ब्रिटेन में कोविड अब भी चिंता का विषय है। इसलिए सुरक्षित दूरी भी रखी जाती है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी सभी नेताओं के गले मिलते रहे। डेली मेल ने प्रधानमंत्री के कई फोटो छापे हैं। हर फोटो के नीचे लिखा है कि किस प्रकार मोदी से गले मिलते दूसरे नेता असहज हैं।

यह खबर प्रकाशित होते ही भारत में सोशल मीडिया में वायरल हो गई। लोग कहने लगे कि यह गले मिलना नहीं, गले पड़ना है। लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने कहा-गले मिलने और गले पड़ने का फ़र्क़ अपनी जगह, पर पर्यावरण के विश्वसम्मेलन में तो महामारी की काली छाया को तो नहीं भूल जाना चाहिए! ⁦@DailyMailUK⁩ की टीका हमें शर्मिंदा करती है।

फिल्मकार अनिनाश ने ट्वीट किया- @DailyMail ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंतोनियो गुटेरस के इस प्रकार ‘गले पड़ने’ को घोर आपत्तिजनक बताया है। अख़बार ने इसके अलावा भी अन्य विश्व नेताओं के गले पड़ते मोदी की तस्वीरें साझा करते हुए आपत्ति जताई है। फिल्मकार विनोद कापरी ने कहा- गले पड़ना इसी को तो कहते हैं ना ? एक मतदाता ने लिखा-साहब की यही स्टाइल है पहले गले पड़ के फ़ोटो निकलते है फिर अंध भक्त और गोदी मीडिया हफ्ते भर मार्केटिंग करेगे की साहब का डंका बजता है विदेश में।

हिमांशु जैन नायक ने लिखा-अपरिपक्व, अविवेकी और अज्ञानी शासक अपनी मूर्खता भरी हरकतों से अपना ही नहीं बल्कि देश का नाम भी बदनाम करता है और वो अपनी इस बेवकूफी भरी हरकतों को अपना मास्टर स्ट्रोक समझता है और उसकी खरीदी हुई गोदी मीडिया ऐसी हरकतों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाती है। जैसा आका वैसे उसकी राग दरबारी गोदी मीडिया।

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