मुन्ना कुरैशी के साथियों को सलाम, जान पर खेल कर बचाई 41 जानें

मुन्ना कुरैशी के साथियों को सलाम, जान पर खेल कर बचाई 41 जानें

मुन्ना कुरैशी के साथियों को सलाम, जान पर खेल कर बचाई 41 जानें। गोदी मीडिया इनका नाम नहीं ला रहा सामने। जहां मशीनें फेल हो गई, वहां ये मजदूर बने मसीहा।

17 दिनों तक टनल में फंसे मजदूरों का नया जीवन देने वाले मुन्ना कुरैशी तथा इनकी टीम को सलाम। जब तमाम मशीनें फेल हो गईं, तो इन रैट माइनर्स ( हाथ से खोदकर टनल बनाने वाले) ने पतली सी सुरंग खोद कर, जिसमें जान जाने का खतरा था, 41 मजदूरों को नया जीवन दिया। मुन्ना कुरैशी ने जब आखिरी पत्थर हटाया और दूसरी छोर पर पहुंचे, तो वहां फंसे सभी मजदूरों ने मुन्ना कुरैशी को गले लगया, गोद में उठा लिया। उन मजदूरों की आंखों में आंसू आ गए। बाद में मुन्ना कुरैशी ने कहा कि उसने यह सब देश के लिए किया है। रैट माइनर्स की टीम में मुन्ना कुरैशी, वकील हसन, फ़िरोज़, देवेंद्र, राशिद, जतिन, इरशाद, मोनू, नसीम, सौरभ और नसीर शामिल थे।

गोदी मीडिया इनका नाम सामने लाने में हिचक रहा है, लेकिन सोशल मीडिया में ये देश के नए नायक बन कर उभरे हैं। कई लोगों ने इन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार देने की मांग की है। कवि और स्क्रिप्ट राइटर पुनीत शर्मा ने कहा जब मैंने देखा कि रेट माइनर्स ने किस पतले से पाइप में घुसकर सुरंग खोदी है, तो उसे देखकर ही मेरी साँस फूलने लगी। उस एक पतली सी सुरंग में अपनी जान जोखिम में डालकर मजदूरों को निकलना, बहुत ही ज़्यादा जोखिम का काम था। मुन्ना कुरैशी, वकील, हसन और उनकी टीम के सदस्य फ़िरोज़, देवेंद्र, राशिद, जतिन, इरशाद, मोनू, नसीम, सौरभ, नसीर सभी को भारत की तरफ़ से कम से कम राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए। नेता केवल भाषणों में अपनी जान दाँव पर लगाते हैं और इस काल्पनिक शहादत के लिए नागरिकों से तालियाँ माँगते हैं। असल जीवन में मुन्ना कुरैशी, वकील, हसन और उनकी टीम के सदस्य फ़िरोज़, देवेंद्र, राशिद, जतिन, इरशाद, मोनू, नसीम, सौरभ, नसीर जैसे लोग ही ये साहस कर पाते हैं।

सीबीएफसी के पूर्व सदस्य डॉ मेराज हुसैन ने कहा 1. वकील 2. मुन्ना 3. फ़िरोज़ 4. मोनू 5. नसीम 6. इरशाद 7. अंकुर 8. राशिद 9. जतिन 10. नासिर 11. सौरव 12. देवेंद्र। ये हैं वो “rat miners” के नाम है जिनकी वजह से 41 लोग सुरंग से सुरक्षित निकाले जा सके। अंतिम की 15 मीटर की खुदाई में जब बड़ी बड़ी मशीनें विफल हो गई और विदेशी एक्सपर्ट्स तक सोच में पड़ गए तब 12 लोगों ने कुछ ऐसा किया जिससे हमारे मज़दूर सही सलामत बाहर आ पाए। इन सब जाबांजों और हर उस जवान का शुक्रिया जिन्होंने इस काम को कर दिखाया।

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