नीतीश की नौवीं पलटमारी पड़ गई भारी, जानिए आगे क्या होगा

नीतीश की नौवीं पलटमारी पड़ गई भारी, जानिए आगे क्या होगा। धूल में मिली प्रतिष्ठा। जानिए लोकसभा चुनाव में कैसे होगा भारी नुकसान। खतरे में CM की कुर्सी भी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नौवीं पलटमारी महंगी पड़ गई है। जिस भाजपा के साथ गए, वहां भी कोई भरोसा नहीं कर रहा और अपने आधार में भी असमंजस की स्थिति बनी। संघ समर्थक पांचजन्य ने नीतीश कुमार की पलटमारी से पहले ट्विटर पर पूछा था कि क्या नीतीश कुमार पर भरोसा किया जा सकता है? जवाब में 95 फीसदी लोगों ने कहा कि नीतीश कुमार पर बिल्कुुल भरोसा नहीं किया जा सकता। लोगों ने जवाब में भारी नाराजगी दिखाई है। उन्हें धोखेबाज तक कहा है। संघ समर्थक पांचजन्य को मिले इस जवाब से समझा जा सकता है कि भाजपा समर्थक चुनाव में नीतीश कुमार को सबक सिखाने का ठान सकते हैं। भाजपा के जनाधार में नीतीश कुमार से नाराजगी उनके प्रत्याशियों को भारी पड़ सकती है। ऐसी संभावना व्यक्ति की जा रही है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा समर्थक जदयू के लिए वोट नहीं करेंगे या मतदान के दिन घर से नहीं निकलेंगे। अगर पांच से दस प्रतिशत भी भाजपा समर्थकों ने उदासी दिखाई, तो जदयू प्रत्याशियों का जीतना कठिन हो जाएगा।

इधर पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने ऐसी रणनीति बनाई है, जिससे जदयू के सामने नई परेशानी आ गई है। उम्मीद थी कि तेजस्वी यादव नीतीश कुमार पर हमले करेंगे, भला-बुरा कहेंगे, लेकिन तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार हमारे लिए पहले भी आदरणीय थे और आज भी आदरणीय हैं। आगे भी वे मेरे लिए आदरणीय रहेंगे। ऐसा कह कर तेजस्वी यादव ने जदयू कार्यकर्ताओं और नेताओं के दिल को छू लिया है। अब माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव जदयू के उन विधायकों को नजदीक लाना चाहेंगे, जो नीतीश के भाजपा के साथ जाने से नाखुश हैं अथवा समझते हैं कि राजद के साथ रहने से 2025 में उनकी जीत होगी। आठ से दस विधायक ऐसे हो सकते हैं, जिनती जीत राजद गठबंधन में आसानी से हो सकती है। ऐसे विधायकों को तेजस्वी यादव 2025 में टिकट देने का आश्वासन दे सकते हैं और इसके लिए तत्काल विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने को कह सकते हैं। अगर दस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया, तो नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री रहना असंभव हो जाएगा।

तेजस्वी यादव की एक घोषणा भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2024 में जदयू खत्म हो जाएगा। तेजस्वी यादव ने मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह नीतीश कुमार के प्रति कोई व्यक्तिगत हमला नहीं किया और वे दिखा रहे हैं किसी जल्दबाजी में नहीं हैं। इधर एनडीए ने विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को हटाने की नोटिस दे दी है। अगर चौधरी विस अध्यक्ष नहीं रहे, तब भी जदयू विधायकों को इस्तीफा देने से कैसे रोका जा सकता है।

स्थिति यह है कि बिहार में एनडीए सरकार अस्थिर बनी हुई है और जल्द ही फिर से उथल-पुथल हो सकता है।

नीतीश की पलटी के बीच एक और सियासी जंग, 27 को रास चुनाव

By Editor


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