प्रेस का गला घोंटनेवाले नड्डा किस मुंह से जेपी के घर गए : राजद

राजद ने पूछा प्रेस का गला घोंटनेवाले नड्डा किस मुंह से जेपी के घर गए। जेपी लोकतंत्र के लिए लड़े। आज लोकतंत्र को खत्म करनेवाले उनके घर जा रहे। यह ढकोसला है।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा गुरुवार को जेपी आवास पहुंचे। राजद ने तीखा सवाल खड़ा किया। पूछा कि जेपी ने प्रेस की आजादी, लोकतंत्र के लिए संपूर्ण क्रांति का बिगुल फूंका था। आज प्रेस का गला घोंटने वाले किस मुंह से जेपी आवास गए।

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि उम्मीद थी कि भाजपा अध्यक्ष नड्डा लोकनायक जयप्रकाश नारायण और भाजपा के दिग्गज नेता रहे कैलाशपति मिश्र की तस्वीर के समक्ष अपनी गलतियों के लिए पश्चाताप करते हुए माफी मांगेंगे। राजद प्रवक्ता ने कहा कि जयप्रकाश बाबू ने लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रेस की आजादी, भ्रष्टाचार और समतामूलक व्यवस्था लागू करने के लिए सम्पूर्ण क्रान्ति का आह्वान किया था और भाजपा आज इसके विरुद्ध खड़ी है। संविधान का माखौल उड़ाने वाली, लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचलने वाली, सच बोलने वाले पत्रकारों को परेशान कर अघोषित सेंसरशिप लागू करने वाली और समतामूलक समाज के निर्माण का महत्वपूर्ण कड़ी जातीय जनगणना का विरोध करने के साथ ही भ्रष्टाचारियों को खुलेआम संरक्षण देने वाली पार्टी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को जेपी का नाम लेने और उनके आवास पर जाकर बगैर पश्चाताप किए लौट जाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि कैलाशपति जी से सैद्धांतिक मतभेद के बावजूद सभी दलों के नेता उन्हें काफी सम्मान देते हैं। वे भी सैद्धांतिक मतभेदों के बावजूद दूसरे दलों के नेताओं को इज्जत देते थे। कभी किसी के प्रति कटू और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग नहीं किया। पर जिस भाजपा को उन्होंने सींच कर सत्ता का भागीदार बनाया। अन्तिम समय में उसी भाजपा द्वारा उन्हें और उनसे जुड़े लोगों को दरकिनार कर दिया गया था। स्थिति तो यह हो गई कि उनके पुत्रवधू सिटिंग विधायक दिलमणी जी को 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी से दूध की मक्खी की तरह बाहर कर दिया गया था। और आज जब भाजपा को यह एहसास हो गया है कि 2024 में उसकी विदाई सुनिश्चित है तो उसे कैलाशपति जी भी याद आ रहे हैं और दिलमणी जी भी ।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष को यह नहीं भूलना चाहिए कि जेपी का आन्दोलन किसी व्यक्ति अथवा पार्टी के विरुद्ध नहीं बल्कि तत्कालीन व्यवस्था और आपातकाल के खिलाफ था। जबकि आज स्थिति उससे भी बद्तर हो गई है। बगैर आपातकाल के आपातकाल से भी भयावह स्थिति हो गई है। इसलिए जेपी के भूमि पर आकर भाजपा अध्यक्ष यदि जेपी की दुहाई देते हैं तो यह जेपी का अपमान होगा।

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By Editor


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