PUCL ने की जांच, बारसोई पुलिस गोलीकांड को बताया बर्बर

नागरिक अधिकार संगठन PUCL ने बारसोई पुलिस गोलीकांड की जांच की। हर पक्ष के बयान दर्ज किए। गोलीकांड को बताया अनुचित, विवेकहीन तथा बर्बर कार्रवाई।

पीयूसीएल (पीपुलिस यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज) की टीम ने कटिहार के बारसोई पहुंच कर पुलिस फायरिंग की जांच की। संगठन ने पुलिस फायरिंग को अनुचित बताया है। जांच टीम ने घटनास्थल का सूक्ष्म ढंग से निरीक्षण किया तथा गोलीकांड से जुड़े सरकारी पदाधिकारी से साक्षात्कार के दरमियान उनका कथन नोट किया। पीड़ित परिवार का कथन नोट किया। धरना प्रदर्शन के आयोजकों का बयान लिया। प्रत्यक्षदर्शियों, विद्युत पदाधिकारी, स्थानीय विधायक का ज्ञापन देखा और नोट किया। बिहार सरकार के बिजली मंत्री का संवेदनहीन बयान भी नोट किया। सरकारी अस्पताल में घायल पुलिस अधिकारियों और विद्युत विभाग के कर्मचारियों के जख्म का नेचर देखा। घटना से संबंधित सारी प्राथमिकी और परिवाद पत्र का अध्ययन किया। बारसोई अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी का बयान लिया जो घटनास्थल के कैंपस में बिल्कुल सामने हैं और जिनकी आंखों के सामने सारी घटना हुई, उनका साक्षात्कार लेकर उनका बयान दर्ज करने के बाद टीम के सदस्य इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं दिनांक 26 जुलाई, 2023 को विद्युत संबंधी समस्याओं को लेकर पंचायत एवं नगर पंचायत के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में चलाए जा रहे धरना प्रदर्शन पर हुई पुलिस फायरिंग बिल्कुल अनुचित, विवेकहीन, अन्यायपूर्ण और पुलिस प्रशासन की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई है।

पीयूसीएल ने अपनी जांच रिपोर्ट में तथ्यों के आधार पर अपने निषक्रष की पुष्टि की है। अगर कोई आगजनी या हिंसा करता है तो यह गैरकानूनी है और ऐसे व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत गिरफ्तारी अथवा हल्का बल का प्रयोग करने का प्रावधान है ना कि गोली से जान मार देने का प्रावधान है। पुलिस पदाधिकारी को आत्मरक्षा में तभी गोली चलाने का अधिकार है जब हमलावर की नीयत उस अधिकारी को जान से मारने की हो अथवा सरकारी संपत्ति की अपार क्षति की संभावना हो। उपयुक्त सारी कसौटीइयों पर जब इस पुलिस फायरिंग को कसा जाता है तो यह कहीं से जायज नहीं है क्योंकि ना तो किसी पुलिस अथवा विद्युत कर्मचारी को सीरियस चोट लगी है और न ही विद्युत कार्यालय में आगजनी की घटना का कोई सबूत है। दूसरी तरफ मृतक और घायल को सर के ऊपर छाती में गोली मारी गई है। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिक में ना तो लाठी चार्ज का जिक्र है और न ही हवा में फायर करने का। इसके साथ ही प्राथमिकी में भीड़ से एक व्यक्ति द्वारा चार-पांच बार बारी-बारी से फायर करने की बात कही गई है किंतु किसी विद्युत कर्मचारी या पुलिस को कहीं भी गोली नहीं लगी है।

पीयूसीएल की जांच टीम में किशोरी दास, पूर्व महासचिव तथा राज्य परिषद सदस्य गालिब खान थे।

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