कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मेहनत से देश में आरक्षण और संविधान बच गया। दोनों ने मिल कर यूपी में ऐसी आंधी तैयार की कि भाजपा के मंसूबे उड़ गए। दोनों नेताओं ने नफरत की राजनीति की हवा निकाल दी। धार्मिक उन्माद पैदा करने की कोशिश को विफल कर दिया और भाजपा को जमीन पर ला दिया। उत्तर प्रदेश ने इतिहास रच दिया। 80 में 80 सीट जीतने का दावा करने वाली भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई। सपा को 36 सीटें मिलीं। कांग्रेस को सात पर जीत मिली। 75 सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी थे, जिनमें 72 सीटों पर भाजपा के वोट कम हो गए। इनमें 12 सीटें ऐसी हैं, जहां एक लाख से अधिक वोट कम हो गए। उत्तर प्रदेश ने भाजपा को बहुमत से दूर कर दिया। उस पर से अयोध्या में भाजपा को पराजित करके मोदी-शाह की राजनीति को जबरदस्त चोट पहुंचाई। हाल ये है कि सपा-कांग्रेस में उत्साह भर गया है, दोनों दल अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर करने का अभी से दम भर रह हैं और भाजपा में भयानक पस्ती आ गई है।

भाजपा की ‘गर्मी उतारने’ के पीछे राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मेहनत, रणनीति और जनता के मुद्दे पर टिके रहना प्रमुख कारण है। दोनों ने भीषण गर्मी में तूफानी दौरा किया। रोड शो और रैलियों से भाजपा के खिलाफ माहौल बना दिया। अखिलेश यादव ने पीडीए-पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण तैयार किया। इन्हीं वर्गं को टिकट में तवज्जो दिया।

दोनों नेताओं ने संविधान बचाने, पेपर लीक, अग्निवीर, नौकरी, छुट्टा जानवर को बड़ा मुद्दा बनाया। भाजपा नेताओं ने संविधान खत्म करने का दावा किया, जो उल्टा पड़ गया। असर ये हुआ कि बसपा को दलित वोट भी इंडिया गठबंधन के साथ आ गया। पिछड़ों, अतिपिछड़ों, मुस्लिम के अलावा दलितों के समर्थन ने इंडिया गठबंधन को नई धार दे दी। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मेहनत ने न सिर्फ यूपी बल्कि देश की राजनीति बदल दी।

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अब भाजपा पूरी तरह जदयू और टीडीपी पर निर्भर है। टीडीपी ने कहा कि वह पांच प्रतिशत मुसलमानों को आरक्षण देने के वादे पर कायम है। प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम आरक्षण खत्म करने की घोषणा की थी, लेकिन अब वे इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप हैं। देश की राजनीति में विपक्ष के हौसले बुलंद हैं और भाजपा के हिंदुत्व का सारे एजेंडे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। अब देश राहुल और अखिलेश के अगले कदम की तरफ देख रहा है।

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By Editor


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