Ramesh Bidhuri जैसे नफरती ही भाजपा की आखिरी उम्मीद हैं

Ramesh Bidhuri जैसे नफरती ही भाजपा की आखिरी उम्मीद हैं

भाजपा के सांसद Ramesh Bidhuri द्वारा सदन में दानिश अली को कटुआ, भड़ुआ, आतंकवादी व उग्रवादी कहा जाना आपा खोने का मामला नहीं है.एक सुनियोजित रणनीति है.

Irshadul Haque, Editor naukarshahi.com

भाजपा और उसके नेता नरेंद्र मोदी की गिरती लोकप्रियता और ठीक इसके समानांतर इंडिया गठबंधन की बढ़ती लोकप्रियता भाजपा की नींद हराम कर चुकी है. सदन में महिला आरक्षण बिल पास कराने से उसे उम्मीद थी कि वह भारत की सियासत के डिसकोर्स को बदल देगी और नरेंद्र मोदी की हिरोइक इमेज वापस आ जायेगी. लेकिन हुआ उलटा. महिला आरक्षण कानून बन जाने के बावजूद इस मामले में भाजपा बुरी तरह फंस गयी.

एक तो यह कानून अगले एक दशक बाद ही अमल में आने की संभावना है और दूसरे इसमें ओबीसी महिलाओं को शामिल न किये जाने से देश भर के ओबीसी समाज में भयंकर नाराजगी है. ऐसे में भाजपा के पास आखिरी हथियार यह बचता है कि वह मुस्लिमों के खिलाफ नफरत उगल कर माहौल को विषैला बनाये ताकि लोगों का ध्यान असल मुद्दे से भटकाया जा सके.

सदन में रमेश बिधुड़ी कांड उसी रणनीति का हिस्सा है.

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यह बात तब और मजबूती से साबित होती जा रही है जब भाजपा अपने जहरीले सासंद रमेश बिधुड़ी की बचाव में जुट चुकी है. दूसरी तरफ वह इसके लिए कुंअर दानिश अली को ही पूरी निरलज्जता से दोशी ठहराने लगी है. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा स्पीकर ओम बिड़ला को लिखे पत्र से यह बात और मजबूती से साबित होने लगी है.

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निशिकांत ने स्पीकर को पत्र लिख कर दानिश अली की सदन में कथित भड़काऊ टिप्पणी और रमेश बिधुड़ी को उकसाने के मामले की जांच करने को कहा है.

मामले पर गौर करें

संसद के विशेष सत्र को मोदी सरकार ने एक ऐसे रामबाण के रूप में इस्तेमाल करना चाहा. वह देश के तल्ख मुद्दों से बुरी तरह घिरी हुई है. उसे लगा कि विशेष सत्र बुला कर महिला आरक्षण बिल पास कर दिया जाये तो वह समूचे सियासी डिसकोर्स को अपने पक्ष में कर लेगी. लेकिन महिला आरक्षण कानून की दो भयंकर खामियों ने मोदी सरकार की योजना में पलिता लगा दिया. पहला- यह कानून जनगणना करने के बाद लोक सभा सीटों के परिसिमन के बाद लागू होगा. यानी कोई दस साल बाद. दूसरा- इस कानून में ओबीसी महिलाओं को आरक्षण से वंचित रखा जायेगा. इन दो मुद्दों की विपक्ष, खास तौर पर राहुल ने हवा निकाल दी. उन्होंने सवाल किया कि देश के 90 मंत्रालयों के सचिवों में मात्र तीन सचिव ओबीसी से क्यों हैं? दूसरा ओबीसी महिलाओ को महिला आरक्षण कानून से बाहर क्यों किया गया?

इन दो सवालों ने मोदी के रामबाण को ध्वस्त कर दिया. भाजपा को फायदा होने के बजाये उसके खिलाफ भयंकर माहौल तैयार हो गया. बस यही कारण था कि भाजपा ने इस विशेष सत्र मिल सकने वाले लाभ को साम्प्रदायिक जहर से पाटने की योजना बनायी.

कुअंर दानिश अली को इसी वजह से भाजपा ने निशाना बनाया. वह मुसलमान हैं. भाजपा व मोदी के सख्त आलोचक हैं. लेकिन भाजपा के इस बेहूदा रवैये ने उसे और फंसा दिया है.