RCP-Kushwaha 90 दिन में एक साथ क्यों नहीं दिखे

RCP-Kushwaha 90 दिन में एक साथ क्यों नहीं दिखे

NDC Desk

RCP-Kushwaha जनता दल युनिाइटेड के दो बड़े नेता हैं. 15 मार्च को कुशवाहा ने जदयू में अपनी पार्टी का विलय कर लिया था. इन 90 दिनों में दोनों नेता कभी एक मंच पर साथ नहीं आये.

जब उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू में अपनी पार्टी रालोसपा का विलय किया तो उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हुई. उन्होंने कुशवाहा को पार्टी संसदीय दल का अध्यक्ष बनाया. फिर उसके बाद कुशवाहा को विधान परिषद का सदस्य बनाया गया. लेकिन इन तमाम अवसरों पर आरसीपी सिंह ( RCP Singh) मौजूद नहीं थे.

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इस बीच उपेंद्र कुशवाहा ने इस मामले पर अपनी राय बेबाकी से रखी है. न्यूज18 से उन्होंने कहा कि  उनके और आरसीपी के बीच कुछ सही नही चल रहा. उन्होंने कहा कि मेरे और आरसीपी सिंह के बीच संबंध बेहतर हैं. वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. हाल में भी उनसे बात हुई थी जब कोरोना संकट के दौरान मै दिल्ली में था.

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी बैठक में साथ होना तब जरूरी होता है जब वैसी कोई बैठक हो. अभी तक वैसी कोई बैठक हुई नहीं है जिसमें एकसाथ रहना जरूरी हो. कुशवाहा ने कहा कि हर बैठक में सभी लोग उपस्थित रहें, ऐसा जरूरी नहीं है.उन्होंने यह तक कह दिया कि क्या अभी ही आरसीपी सिंह को फोन लगाकर बात कर लूं.

हालांकि उपेंद्र कुशवाहा और आरसीपी सिंह संबंधों के बारे मे जदयू के अंदरखाने मेें एक और चर्चा है. सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार में जदयू को जगह मिल सकती है. ऐसी स्थिति में आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री बन सकते हैं. वैसी स्थिति में आरसीपी सिंह को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ सकता है. जदयू के एक धड़े के नेताओं का मानना है कि वैसी स्थिति में उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के अध्यक्ष बन सकते हैं. हालांकि इस तर्क के खिलाफ भी कुछ नेता अपना तर्क रखते हुए कहते हैं कि पार्टी के प्रदेश और राष्ट्रीय दोनों पदों पर कुशवाहा समाज का ही नेता नहीं रह सकता. ऐसे में या तो प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को पद छोड़ना पड़ सकता है. या फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए किसी गैर कुशवाहा को चुना जा सकता है.

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